लघुकथा

मुफ्तखोरी

मुफ्तखोरी जिस कार्यालय में मैं नौकरी करता हूँ, वहाँ एक प्रकार की परिपाटी-सी बनी हुई है कि कनिष्ठ कर्मचारी ही अपने पैसों से वरिष्ठों को चाय-पानी कराते हैं. न चाहते हुए मैं भी मन-मारकर कई साल तक इस उम्मीद से परम्परा का निर्वहन करता रहा कि कभी मैं भी वरिष्ठ बनूंगा और कनिष्ठों से मुफ्त […]

हास्य व्यंग्य

पेट्रोल लोन के साथ मुफ्त कार का ऑफर

पवैसे जानने वाले तो मानते ही हैं लेकिन अब यह बात तो आपको भी मान ही लेनी चाहिए कि मैं बचपन से ही टेलेंटेड बंदा रहा हूँ। खोटा सिक्का किस बाजार या दुकान में किस समय और किस दुकानदार के बैठने पर चलेगा, दो अलग-अलग फटे हुए नोटों को जोड़ एक बनाकर बिंदास चलाना, एक […]

हास्य व्यंग्य

 पड़ोसन की मी टू

आजकल ‘मी टू’ का कहर किसी सुनामी से कम नहीं, जिसने हमारे जैसे किसी भी बेहद ही शरीफ और संवेदनशील मर्द के बच्चे को, जिसने कभी धोखे से भी स्कूल, कॉलेज या ऑफिस के दिनों में या अपने पास-पड़ोस या रास्ते में आते-जाते किसी खूब/कम सूरत/सीन बला/अबला को छू लिया हो, या घूर कर देख […]

कहानी

व्यंग्य कहानी – मोबाइल महात्म्य

“अजी सुनते हैं।” कहती हुईं हमारी श्रीमती जी मोबाइल हाथ में पकड़े मेरे सामने आकर खड़ी हो गईं। “अजी सुनाइए तो…” हमने भी मोबाइल से नज़रें हटा कर श्रीमती जी को प्यार से देखते हुए कहा। “लगता है ये मोबाइल खराब हो गया है। आजकल ये अटक-अटक कर चलता है.” श्रीमती जी ने शिकायती लहजे […]

हाइकु/सेदोका

चन्द हायकु

चन्द हायकु 1. चुप रहना कुछ मत कहना कर दिखाना। ———– 2. अकेला तू ही बदलेगा दुनिया शुरु तो कर। ———– 3. शिक्षा जरूरी जीवन-संग्राम में डिग्री नहीं। ———– 4. सब संभव कुछ न असंभव करके देख। ———- 5. प्रतिभा कभी मोहताज न रही परिवेश की। ———- 6. यथार्थ में है वास्तविक योग्यता ढोंग में […]

बाल कहानी

अनुभव

मनोज दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी बहुत तेज था। वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी । उसके सभी पर्चे अच्छे हुए थे। इसलिए वह निश्चिन्त था। उसने निश्चय किया कि वह गर्मी की छुट्टियों में अपने पापा जी के साथ उनकी […]

बाल कहानी

सबक

बहुत पुरानी बात है। नंदनवन में एक तालाब था। उसके किनारे एक बेल का पेड़ था। उस पेड़ पर एक नटखट बंदर रहा था। वह दिन भर उछलकूद करता रहता था। इस पेड़ से उस पेड़ और इस डाली से उस डाली पर वह छलांग लगाकर ऐसे-ऐसे करतब दिखाता कि दूसरे जानवर दाँतों तले ऊँगली […]

लघुकथा

इमोशनल पोस्ट

इमोशनल पोस्ट “हलो।” “हल्लो मम्मी, कैसी हैं आप ?” “मैं तो ठीक हूं, पर तुम्हें ये क्या सनक चढ़ी है रक्तदान करने की। अभी दो महीने पहले ही ब्लड डोनेट किए थे। और अब फिर से ? क्या हर किसी के बर्थ डे और एनिवर्सरी में रक्तदान करना जरूरी  है ?” “क्या मम्मी आप भी… […]

लघुकथा

बोल बम

सावन का महीना था। केसरिया रंग के झण्डे, केसरिया परिधान, कंधे पर काँवर लिए शिव भक्तों का हुजूम चला जा रहा था। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारों से आकाश गूँज रहा था। काँवर ढोने वाले शिवभक्त हर बात का जवाब ‘बम’ जोड़कर दे रहे थे। सड़क किनारे शंकर बाबा एकत्रित सूखी लकड़ियों का […]

लघुकथा

भक्ति

पूरी पंडिताइन है मालती। गजब की पूजा-पाठी कोई भी व्रत-त्योहार नहीं छोड़तीं। हरेली, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि, करवा चौथ, हरितालिका व्रत, सब निर्जला रखती हैं। आज के युग में भी वह प्याज, लहसुन तक नहीं खाती। वह अन्नपूर्णा देवी का व्रत करती है। इस बार उद्यापन करना था। धूमधाम से तैयारियाँ चल रही थी। रोज बाजार आना-जाना […]