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  • सरसी छंद रचना – दुर्गा स्तुति

    सरसी छंद रचना – दुर्गा स्तुति

    नमो नमो है माता दुर्गे ,तेरी जय जयकार । सिंह वाहिनी मात भवानी ,वन्दन बारम्बार ।। तुम ही सृजन रूप में माता ,पालक रूप तुम्हार । कल्प अंत संहाररूपिणी ,जग तेरा विस्तार ।। शत रूपा  है...

  • सुगत सवैया – तृष्णा

    सुगत सवैया – तृष्णा

    मन रूपी घट  बसे साँवरे,फिर भी तृष्णा रही अधूरी । जैसे वन वन ढूँढ़ रहा मृग ,छिपी हुई मन में कस्तूरी । लोभ ,मोह अरु मद माया में ,मृग तृष्णा सा मन भटका है । जनम...

  • लौट आओ अब

    लौट आओ अब

    सुनो,….आज हमारे विवाह को 23 वर्ष पूरे होने आए ।इन तेईस वर्षों में हमने जाने कितने दुख सुख एक साथ देखे हैं ।बहुत से उतार- चढ़ाव जीवन मे सहे हैं । एक लंबा सफर एक साथ मिल...

  • समय

    समय

    टिक टिक करती समय की सुइयां कब देती हैं साथ । कितना दौडो भागो पीछे हाथ आये बस काश । कभी दर्द के कांटे छलनी मन कर जातें हैं । मुड़कर देखो अगर जरा  ये हमें...

  • शहीद दिवस (23 मार्च) पर कविता

    शहीद दिवस (23 मार्च) पर कविता

    धरती माँ के लाल भगत थे ,वीर अमर बलिदानी थे । आजादी  के दीवाने थे ,स्वतंत्रता सेनानी थे । हँसते हँसते गले लगाकर ,मृत्यू का मुख चूमा था । भारत माँ के जयकारों से ,वीरों का...

  • गीत (सार छंद)

    गीत (सार छंद)

    परउपकारी जो नर होते, वही धरा सुख पाते। सदा यही कर्तव्य मनुज का, सभी धर्म बतलाते। तरुवर  फल से लदे रहें पर, निज पर नहीं लुटाते। सागर यदि स्वम ही जल पीते, तो सूखे हो जाते।...


  • गीत (लावणी छंद)

    गीत (लावणी छंद)

    अंध भाव व्यापक समाज में ,जीभ है चाटुकारी में । झूठ ,दिखावा औ फरेब ही ,बस है दुनियादारी में । कोर्ट ,कचहरी पुलिस महकमें ,चलते सभी सबूतों पर । बड़े बड़े पद पा सकते हैं ,रिश्वत...

  • गीतिका

    गीतिका

    सुन्दर सलौने श्याम,करुणाकार तुम ही हो तुम ही अमिट एक नाम,जगदाधार तुम ही हो ।। धड़कन तुम्ही से चलती है,साँसे तुम्हारी दी हुयी निष्प्राण मेरे प्राणों का संचार तुम ही हो ।। कब तक भँवर टकरायेगी,नैया...

  • लावणी छंद

    लावणी छंद

    संकल्प अगर दृढ़ ठानोगे ,तो मंजिल को पाओगे । सदा सफलता पाओगे अरु ,हर दिल पर छा जाओगे । मन को विचलित मत करना तुम ,पथ में जो भी शूल मिलें कठिन परिश्रम करो मनुज तो,...