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  • सहिष्णुता का कल्पनालोक

    सहिष्णुता का कल्पनालोक

    आखिर गत चार वर्षों में ऐसा क्या हुआ है जिसने चर्च को इतना बेचैन कर दिया है? क्या पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल है? पहले दिल्ली के प्रधान पादरी अनिल काउटो तो अब गोवा...

  • मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

    मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

    आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना चाहिए। केंद्र सरकार का भी और प्रांतीय सरकारों का भी। चिकित्सा के क्षेत्र में...

  • भारत या इंडिया

    भारत या इंडिया

    आपमें यह अंधविश्वास किसने जगाया है कि भारत के बाहर इस देश का नाम इंडिया है? इंडिया नाम अंग्रेजी हुकूमत का नतीजा है, अरब देश भारत को हिंद कहते है, तुर्की में हिंदिया कहते हैं ,हिंदिया का...

  • शिक्षा के माध्यम की भाषा – मातृभाषा

    शिक्षा के माध्यम की भाषा – मातृभाषा

    भाषा शिक्षण का क्षेत्र अनुप्रायोगिक है। इसमें विभिन्न विषयों के शिक्षण के लिए जिस भाषा का प्रयोग होता है, वह शिक्षा का माध्यम कहलाती है। शिक्षा का माध्यम अपनी मातृभाषा भी हो सकती है और दूसरी...

  • अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    सुविख्यात वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने अखबारों में भ्रष्ट भाषा का जो मुद्दा उठाया है वह प्रासंगिक और सटीक है। इसमें दो राय नहीं कि पिछले कई सालों से हिन्दी की अखबारों में भ्रष्ट...

  • हिंदी अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    हिंदी अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    आजकल मैं मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों और गांवों में घूम रहा हूं। जहां भी रहता हूं, सारे अखबार मंगवाता हूं। मराठी के अखबारों में बहुत कम ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में अंग्रेजी का...

  • हिंदी का एक उपेक्षित क्षेत्र

    हिंदी का एक उपेक्षित क्षेत्र

    हिंदी इस समय एक विचित्र दौर से गुज़र रही है। अनेक शताब्दियों से जो इस देश में अखिल भारतीय संपर्क भाषा थी, और इसीलिए संविधान सभा ने जिसे राजभाषा बनाने का निश्चय सर्वसम्मति से किया, उसे...

  • भाजपा क्यों लगने दे, यह कलंक?

    भाजपा क्यों लगने दे, यह कलंक?

    उत्तरी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली का नगर निगमों पर भाजपा का कब्जा है। ये दोनों निगमें ऐसे भयंकर काम करने जा रही हैं, जिन्हें गुरु गोलवलकर या दीनदयाल उपाध्याय देख लेते तो अपना माथा कूट लेते।...