कविता

सदियाँ गुज़ार रहे हैं

क्यों याद करें गुज़रे वक़्त को, ये वक़्त है जो गुज़र जाता है, जिस वक़्त की सीमा लांघ गये, वो वक़्त फिर नहीं आता है। क्यों याद करें गुज़रे वक़्त को… ये वक़्त है जो गुज़र जाता है। जिस राह निकल कर गया वक़्त, वो राह फिर नहीं दोहराता है, जो आज है, वो कल […]

कविता

तन्हा सफ़र

हूँ मैं सफ़र में तन्हां, तेरा साथ ख़यालो में है, इस तन्हां सफ़र में … , बस तेरी ही कमी है। वर्षों तक जो तेरे साथ, मैंने जो सफ़र किया.., आज इस तन्हां सफ़र में, तेरी याद जो आ रही है। ये सफ़र तन्हां ज़रूर है, लेकिन लक्ष्य साथ है मेरे, आयेगा वो भी एक […]

कविता

बिन्दास चल दो

मत डरो इस दुनियां से, बिन्दास चल दो……..। ज़िद करो, दुनियां बद लो, हालात बदल दो………। कर रहे हैं जो तुम से सवाल, उन सवालों को भी कर दो। प्रयास कर के तो देखो, एक क़दम और चल दो। परेशानियां जो क़दम उठायें, उन को क़दमों से कुचल दो। नफ़रतों की इस सदी को, प्यार […]

कविता

मन की अभिव्यक्ति

अतीत मतलब गुज़रा हुआ काल। सच.. कह रहा है मेरा मन, अतीत को अतीत में रहने दो, भूल गई मैं उन लम्हों को… जो अतीत के गर्भ में चला गया, न जाने कितने आँसुओं से…. दामन भिगोया था उस काल में, न जाने कितनी शर्मिंदगी झेली मैंने, उस काल मे………., भूल गई मैं उस अतीत […]

कविता

कविता

बात रखो तो दमदार रखो, शब्द दर शब्द शानदार रखो, ऐतेबार रखो अपने श्याम पे, आसमान पर नज़र रखो, और ख़्वाबों की महफ़िल में, हमसफ़र पर ऐतेबार रखो, बुलन्दी आसमान सी रखो, उड़ते परिन्दों पर नज़र रखो, जो भी करना है, कर गुज़रना है, यूं ना दिल में अगर-मगर रखो, डगर पे अपने पैर जमा […]

कविता

मैं हूँ नन्हां, तुम हो नन्हें

मैं हूँ नन्हां, तुम हो नन्हें, हम दोनों ही बच्चे हैं, तुम हो पंछी, मैं हूँ बाबा, क्यों अन्तर हम में ऐसे हैं। एक ही रब ने हम को बनाया, अन्तर दोनों में डाला है, तुम पंखों से उड़ान भरते, मैंने पैर सम्भाला है। चलो साथ हम दोनों खैलें, जीवन का आनन्द उठायें हम, तुम […]

कविता

चीख़ती हुई रात

वो तूफ़ानी और सर्द भरी रात,सर्द हवाओं में चीख़ती हुई आवाज़।किसी ने ना सुनी उस अबला की पुकार,जिसको हम ने नाम दिया “दामिनी” अवतार।कितने हैवान बन गये थे वो दरिन्दे, नोच रहे थे उसके जिस्म को वो दरिन्दे।ऐसे दरिन्दों को ‘जन’ कर हर माँ रो पड़ी थीउनकी ख़्वाहिशों की डोर जो टूट पड़ी थी।पीड़ा थी […]

कविता

मुस्कान

सृष्टि की रचना में ईश्वर ने मनुष्य को बनाया, उपहार में उसने मनुष्य को मुस्कान से नवाज़ा, मुस्कान की कला ईश्वर ने सृष्टि में मनुष्य को दी है। नवजात शिशु पाता है एक प्यारी सी मुस्कान निर्दोष और मनमोहक सबको हर लेने वाली मुस्कान, होता है जब बड़ा मनुष्य दैवीय मुस्कान जीवन से चली जाती […]

कविता

कविता : दर्पण

देखा करो अपने आप को कभी दर्पण में शायद तुम्हें नज़र आएगा तुम्हारा मचलना, देखा करो अपनी आँखों की पुतली को कभी दर्पण में शायद तुम्हें महसूस होगा तुम्हारा अफ़साना, देखा करो अपने गुलाबी होंटों को कभी दर्पण में शायद तुम्हें अहसास होगा अपनी मुस्कराहट का, देखा करो अपनी बिखरी ज़ुल्फ़ों को कभी दर्पण में […]

कविता

कविता : मेरे भय्या

तेरे साथ जो बीता बचपन कितना सुन्दर जीवन था, ख़ूब लड़ते थे फिर हँसते थे कितना सुन्दर बचपन था, माँ जब तुझको दुलारती मेरा मन भी चिढ़ता था तू है उनके बुढ़ापे की लाठी ये मेरी समझ न आता था, स्कूल से जब तू छुट्टी करता मेरा मन भी मचलता था फिर भी मैं स्कूल […]