गीत/नवगीत

गीत – पाती आज लिखी है फिर प्रिय!

कैसे बीतेगा यह जीवन,और रहेगी कब तक दूरी? पाती आज लिखी है फिर प्रिय!भेजी नहीं रही मज़बूरी। कहते थे तुम जाता हूँ अब, चाँद सितारे सूरज लाने। स्वप्न मूर्त होने वाले हैं, कुछ पैसे बस और कमाने। आने को थी कितनी आतुर, वो खुशियाँ सब रहीं अधूरी। कैसे बीतेगा यह जीवन,और रहेगी कब तक दूरी? […]

गीत/नवगीत

निवेदन – गीत

एक निवेदन प्रियजन सबसे,यदि चाहो तो स्वीकार करो। जननी-जन्मभूमि पर अपनी,जन-जीवन पर उपकार करो।। माना स्थिति हैै बहुत भयावह, पर भयभीत नहीं होना हैै। संयम और विवेक-बुद्धि से, लड़ना, धैर्य नहीं खोना हैै। हाथ-पैर,मुख का प्रक्षालन, दिन में कई-कई बार करो।। जननी-जन्मभूमि पर अपनी,जन-जीवन पर उपकार करो। एक निवेदन प्रियजन••••••••• छूना और परस्पर मिलना, यह […]

कविता

कोरोना को हराना है

जला सको असीम आस से भरा सुदीप तो, घटे विषाद-यामिनी प्रभात भी समीप हो। सुनो सपूत!क्या कहे वसुंधरा कराहती, रहो सदैव प्रेम-सिक्त बुद्धि-युक्त चाहती।। मनुष्य जीव-जन्तु आदि ना कहीं विलीन हों, न वृक्ष पुष्प वाटिका सुगन्ध से विहीन हों। न आपदा पड़े कभी मिटे अपार वेदना, सुसुप्त प्राण में भरे सुधामयी सुचेतना।। सुदीप्त लालिमा दिखी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चार पैसे के लिए जो छोड़कर घर-द्वार आये। सोचते हैं वो मुलाज़िम क्यों यहाँ बेकार आये? कल उजाले से मिटेगी ये भयावह रात काली, ये न समझो ज़िंदगी की हर ख़ुशी को हार आये। ख़्वाहिशें कुछ ख़्वाब लेकर उड़ चले थे जो पखेरू, फड़फड़ाते जाँ बचाते लौटकर लाचार आये। कैद करना चाहता जब आदमी आबो-हवा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फासले सब भरा नहीं करते, क्यों यकीं तुम ज़रा नहीं करते। ग़म रहेंगे हयात में तब तक, इश्क़ जब तक खरा नहीं करते। दोस्त सच्चे सदा हँसाते हैं, घाव दिल का हरा नहीं करते। नूर फैला उन्हीं चराग़ों का, जो हवा से डरा नहीं करते। बात मरने की मत ‘अधर’ करना, यूँ सुख़नवर मरा नहीं […]

गीत/नवगीत

अनुरोध

हिय!निवेदन एक तुमसे,मत व्यथा के गीत गाना। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को है हँसाना।। स्वार्थ में डूबे मनुज को, आभास है क्या त्याग का। मीत को जो छ्ल रहा नित, है अरि वही अनुराग का। सुप्त क्यों शुचि भावनाएँ,मन! तनिक इनको जगाना।। प्राण में भरकर अमिय प्रिय,इस जगत को हैै हँसाना।। ईश की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

साल दर साल यूँ गुजरते हैं। ख़्वाब हर बार कुछ सँवरते हैं।। काश!उल्फत निभा सको तुम भी, जिस्म क्या जाँ तलक़ निखरते हैं। ज़िन्दगी में रहे सदाकत ही, ये दुआ बेपनाह करते हैं। शूल सा क्यों मिज़ाज रखना है, फूल बनकर चलो बिखरते हैं। गर खुशी का ‘अधर’ समां हासिल, ग़म कहाँ पास तब ठहरते […]

गीतिका/ग़ज़ल

पिता

घर भर की हैं आस पिता। रहते दिल के पास पिता।। घेरे सघन अँधेरा जब। बनते तभी उजास पिता।। आभा माँ के माथे की। जीवन में मधुमास पिता।। कर्म सभी करना ऐसे। ना हों कभी उदास पिता।। कंटक चुनते हैं पथ के। ईश्वर का आभास पिता।। नेह-प्रेम आशीष फलें। करते हैं विश्वास पिता।। कष्ट मौन […]

कविता

कह मुकरी

(१) याद वही दिन हर क्षण आते, अश्रु नयन में भर भर जाते। बिन देखे अब रहा न जाता, ऐ सखि साजन?नहिं प्रिय माता।। (२) नखरे करके मुझे सताते, बार -बार छूकर मुस्काते। लगते अच्छे दिल के सच्चे, का सखि साजन?ना सखि बच्चे।। (३) हर सुख -दुख में साथ निभाये, साथ    उसीके   जीवन  भाये। […]

गीत/नवगीत

जीवन श्रृंगार

यहाँ है स्वर्ग यहीं आनन्द। यहीं है जीवन का मकरन्द।। दिया तुमने ही जब यह ज्ञान। हृदय में बसकर हे भगवान! विकल हो कहे नयन का नीर। मिटा दो मेरे मन की पीर।। फँसी है क्यों नौका मँझधार? पकड़ ली जब तुमने पतवार।। सुनो हे! सीता के श्री राम। तुम्ही हो राधा के प्रिय श्याम।। […]