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  • पाषाण – मनुज

    पाषाण – मनुज

    अमित अमीत अधूत आज क्यों , मनमानी कर उतराये हैं ? समीकरण क्यों बदल रहे हैं, समदर्शी क्यों घबराये हैं ? अब कैसी है यह दुरभिसंधि, दुरुत्साहन यह कैसा है ? दुराग्रही के आगे नत क्यों,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तल्खियाँ दिल से भुलाते तो चमन गुलजार होता । गीत मेरे गूँजते मनमीत का गर प्यार होता ।। वो खुदा फरखुंद उल्फ़त की इबादत से नवाजे । पर चलन कैसा अजूबा रूह का व्यापार होता ।।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गज़ल *****   लहू का  रंग इक जैसा,चली  तलवार जाने  क्यूँ। वही मौला वही कृष्णा  , बँटे  दरबार   जाने क्यूँ।।   सिसकता खूबसूरत जग ,बना ,जगतार जाने क्यूँ। सजा का समझता है,स्वयं को,हकदार जाने क्यूँ...

  • गज़ल

    गज़ल

    तुम न होगे तो और क्या होगा । कोई मंज़िल न रास्ता होगा ।। दिन न निकलेगा बिन तेरे दिलबर। स्याह रातों का सिलसिला होगा।। ज़ीस्त तेरे ही नाम कर दी है। वो ही होगा कि...


  • गज़ल

    गज़ल

    लहू का रंग इक जैसा, चली तलवार जाने क्यूँ। वही मौला वही कृष्णा, बँटे घरबार जाने क्यूँ।। सिसकता खूबसूरत जग, बना, जगतार जाने क्यूँ। सजा का समझता है, स्वयं को, हकदार जाने क्यूँ ।। लगी है आग नफरत की, धुआँ...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नज़र की क्या कहें अब तो ज़िगर भी हो गए पत्थर कहाँ बू -ऐ-वफा खोयी कि घर भी हो गए पत्थर खुदा तब बेबसी में शब- सहर रोया यकीनन है गुलों से खिलखिलाते जब शज़र भी...

  • मनमीत

    मनमीत

    थे   हम  तुम  तब   बहुत  अपरिचित ,पर    चिर    परिचित   से   लगते  थे ।इक  दूजे   के  सुख – दुख  सुनने  को,हर   क्षण   उत्सुक   हो   जगते   थे ।। तुमने      ही    चाहा     था     जुड़ना ,जन्मों     का    साथ     बताते      थे...

  • गज़ल

    गज़ल

    आ  सवारें   देश   की   तस्वीर को ।हम  मिटा दें  धीर बन  हर पीर को ।। है   हमारा  ही  सदा   से  अंग  वो।छीन  लेगा  कौन  यूं  कश्मीर  को ।। कत्ल करती है जुबां ही इस कदर ।म्यान...