हास्य व्यंग्य

तरल पदार्थ

चुनाव की ऋतु थी, वैसे ही जैसे प्रेम करने की ऋतु होती है, गोलमाल करने की ऋतु होती है, रिश्वत लेने की ऋतु होती है और घी में डालडा और डालडा में चूना मिलाकर बेचने की ऋतु होती है I इसे आप मौसम भी कह सकते हैं I क्षेत्र के सर्वमान्य और सर्वव्यापी नेताजी कुमार […]

हास्य व्यंग्य

घोटाले का समाजशास्त्र

अपने देश में जब से घोटालों का धारावाहिक आरंभ हुआ है तब से रिश्वतजीवियों की बची – खुची अपराध भावना भी जाती रही है I कल की ही बात है , गुप्ता जी मिल गए I वे हमारे पुराने परिचित हैं , एक सरकारी विभाग में क्लर्क है I रिश्वत के बिना किसी फाइल को […]

हास्य व्यंग्य

भोग- विलास पार्टी का घोषणा पत्र

आजकल जिसे देखो सरकार को गाली देता रहता है जैसे सरकार न हुई, गाँव की भौजाई हो गई I ‘अहर्निशं घूसम प्रियम’ के प्रति अखंड निष्ठा रखनेवाले अधिकारी भी भ्रष्टाचार का रोना रोते हैं I बालू के पुल बनानेवाले ठेकेदार, कमीशनखोर आधुनिक विश्वकर्मा अभियंता, निर्दोष नागरिकों पर बेवजह डंडे बरसानेवाले पुलिस अधिकारी, फाइलों पर कुंडली […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

अरुणाचल प्रदेश के पर्व – त्योहार

अरुणाचल प्रदेश अपने नैसर्गिक सौंदर्य, सदाबहार घाटियों, वनाच्छा्दित पर्वतों, बहुरंगी संस्कृरति, समृद्ध विरासत, बहुजातीय समाज, भाषायी वैविध्यन एवं नयनाभिराम वन्यत-प्राणियों के कारण देश में विशिष्टै स्थाीन रखता है । अनेक नदियों एवं झरनों से अभिसिंचित अरुणाचल की सुरम्यं भूमि में भगवान भाष्कमर सर्वप्रथम अपनी रश्मिो विकीर्ण करते हैं, इसलिए इसे उगते हुए सूर्य की भूमि […]

पुस्तक समीक्षा

दगैल : प्राध्यापकों की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा

आज श्री रूप सिंह चंदेल का उपन्यास “दगैल” पढ़कर समाप्त किया I इसके पात्र कई दिनों तक मेरी नींद में भी आते- जाते और मन को आंदोलित करते रहे I इस उपन्यास में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा प्रस्तुत किया गया है I नारी मुक्ति और नारी स्वतंत्रता की वकालत करनेवाले […]

पुस्तक समीक्षा

“पाथर टीला” : ग्राम्य जीवन के बदलते मिज़ाज का दस्तावेज

जब से गांव में शहरीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी है और शिक्षा का प्रसार व व्यापारीकरण हुआ है तब से एकता की जगह अनेकता, निर्माण की जगह संहार और जोड़ने की जगह तोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है I अब हर जाति के अलग -अलग खूंटे हैं और अपनी-अपनी पंचायत I सामाजिक न्याय के सुनहरे […]

हास्य व्यंग्य

कांग्रेसी नमक का आत्मालाप

दंगाई देश के सम्मानित नागरिक होते हैं, वे भी देश का नमक खाते हैं, उनका भी घर है, परिवार है, समाज है I दंगाइयों की भी निजता होती है, उनका भी अपना निजी जीवन होता है, उनके पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर लगाकर उनकी निजता पर सरकार ने हमला किया है I सरकार जवाब दे कि […]

पुस्तक समीक्षा

“उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” पुस्तक

मेरी पुस्तक “उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” प्रकाशित हो चुकी है I यह अमेज़न पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है I पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है: 1.परिचय : भूमि और लोग – पूर्वोत्तर भारत का परिचयात्मक वर्णन, बंगलादेशी घुसपैठ, पूर्वोत्तर की पौराणिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थल, पूर्वोत्तर की भाषाएँ, धर्म, […]

पुस्तक समीक्षा

“भारत के पूर्वोत्तर में उग्रवाद” : पूर्वोत्तर के उग्रवाद पर प्रामाणिक पुस्तक

स्वतंत्रता के बाद से ही पूर्वोत्तर के राज्य उग्रवादी गतिविधियों से जूझते रहे हैं I विद्रोह और उग्रवाद को दबाने की कोशिशें हुईं लेकिन रक्तबीज की तरह किसी न किसी रूप में उग्रवाद अपना सिर उठा ही लेता है I पूर्वोत्तर का यह दुर्भाग्य है कि पर्याप्त जल संसाधन, प्राकृतिक सम्पदा और जनशक्ति के बावजूद […]

राजनीति

नागरिकता संशोधन बिल और कांग्रेस का पाप

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर पूर्वोत्तर भारत और विशेष रूप से असम उबल रहा है, तरह – तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं, अफवाहों का बाज़ार गर्म है I कांग्रेस, टीएमसी, वामपंथी दल, एआईयूडीएफ आदि दल आंदोलन की आग में अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं I असम के अराजक तत्व भी इसमें कूद […]