Author :

  • बेटी

    बेटी

    बेटी निराली लगती बड़ी प्यारी है बड़ी न्यारी! ……………….. नन्ही कली ने जब आँगन आई बाजे बधाई! …………….. घर आँगन खिली उपवन से लगते प्यारे! ……………… फूलों सा सीचा सर्व गुण भरके नन्हीं परी को! ………………...

  • तमन्ना

    तमन्ना

    आरजु मेरी दिल की तमन्ना  है मिल के रहो! ……………… जीवन के ये अनमोल पल को हँस के ज़ियो! …………… ज़िंदगी एक किराये का धर है फुलते रहो! ……………… प्रेम का दीया मन मे जलाकर खिलते रहो!...

  • तुम

    तुम

    तुम कई बार मेरे ख़्वाबो में आया करते हों तुम्हें देखकर कई सपने सजाती हूँ जैसे कोई अपनो को पास होने का एहसास होता हैं फिर मैं अपने तन्हाई जीवन से दूर हो जाती हूँ सोचती...

  • बेटी

    बेटी

    बटी निराली लगती बड़ी प्यारी है बड़ी न्यारी! ……………….. नन्ही कली ने जब आँगन आई बाजे बधाई! …………….. घर आँगन खिली उपवन से लगते प्यारे! ……………… फूलों सा सीचा सर्व गुण भरके नन्हीं परी को! ………………...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    बना फूलों से ये गजला करें स्वीकार ये माला मिटाये गम सभी मेरे इसी में भाव सब डाला भरोसा है मुझे तेरा तेरे शरणों में अाई हूँ बतादे तूँ कमी मेरी सुधारू भाग्य मैं काला —...

  • गरिबी

    गरिबी

    (३)-: हाय रे गरिबी कैसा ये जुल्म है कोई खाकर मरे तो किसी को अन्न नही खाने को क्या कुदरत की माया है किसी को दिए महल अटारी किसी का झोपडी निवास बना किसी को वस्त्र...

  • कविता – 2

    कविता – 2

    सुबह की हवाओं नेखूबसूरत सुहाने मौसम मेंसूरज का पट खोल दियाजिसे देखकर पूरी सृष्टीका सवेरा हो गयामंद मंद पवनों के झुंडकान में शब्द गुंजाने लगेपशु पक्षी भी झुंड के झुंडदाना चुगने में लग गयेकिसान हल बैलों...

  • कविता

    कविता

    कब से बैठी मैं आस लगाअपने प्रीतम की यादो मेंकब आओगे मेरे प्रियवरदेखूँ अपने नयनों सेबागो से फूलों को चुनकरराहो में फूल बिछायी हूँउस फूलों की गजला बनाकर केप्रीतम के गले पहनाऊगींकब से बैठी मैं आस...

  • निधि छंद.

    निधि छंद.

    बरसते सावन लगे मनभावन मोर वृंदावन देख मन पावन! ………………. नाचे वन मोर देख नयन फार अद्भुत संसार करती मनुहार! ………………… पावन है गगन देखे हरे वन मन मे हैं मगन करती हूँ नमन! …………….. लहरते...