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  • जीवन के अनमोल पल

    जीवन के अनमोल पल

    जीवन के अनमोल पल को व्यर्थ नही गवाना चाहिएँ समय का सदुपयोग सदी कर नित आगे बढ़ना चाहिएँ साथी संगी सबके साथ मिलजुल कर रहना चाहिएँ जीवन ने क्या – क्या सिखलाया नित चिंतन करना चाहिएँ...

  • माँ वह है

    माँ वह है

    माँ वह है जो दिल की हर भावनाओं को समझ लेती है जो खुद दुख सहकर सुख की काया भरती है! माँ वह है जो गिरने पर संभाल लेती है जो उंगली पकड़कर चलना सिखाती है...

  • माँ

    माँ

    माँ मंदिर है मूर्ती है पूजा की थाल है ममता की मूरत है माँ जीवन में खिली कमल है फूलों की महक है सुंदर सी अरमान है धर आँगन की सूरत है माँ खुशियों की बौछार...

  • नन्हे नन्हे बालक

    नन्हे नन्हे बालक

    नन्हें – नन्हें बालक हो उपवन सा सालोने हो! आँगन की फुलवारी हो मीठी सी मुस्कान हो! सबको मीठे बोल सुनातें माता- पिता के आँख के तारें! बागो में खिले फूल हो सबमे महक बिखेरे हो!...

  • मेरे गिरधर

    मेरे गिरधर

    मेरे गिरधर सुन्दर सालोनें वंशी बजाये पनधट जाये मटकी फोड़े यमुना तट पर चीर चुरावे मधुवन बीचे गाय चरावें काली दह में नाग को नाथे कृष्ण सुदामा की मित्रता सारा जग जाने माता यशोदा के आँख...

  • अजीब है दुनिया

    अजीब है दुनिया

    अजीब ये दुनिया अजीब ये सिलसिला क्यों लड़ते हैं लोग क्या मिलता है इन्हें बीज बोते हैं ये तो पौधें उगेंगे ही काँटा बोयेगें ये तो काँटा चुभेंगा ही क्यों नही सोचते लोग कि उपर वाला...

  • कविता

    कविता

    हाय रे गरिबी कैसा ये जुल्म है कोई खाकर मरे तो किसी को अन्न नही खाने को क्या कुदरत की माया है किसी को दिए महल अटारी किसी का झोपडी निवास बना किसी को वस्त्र ही...

  • निधि छंद…

    निधि छंद…

    बरसते सावन लगे मनभावन मोर वृंदावन देख मन पावन! नाचे वन मोर देख नयन फार अद्भुत संसार करती मनुहार! पावन है गगन देखे हरे वन मन मे हैं मगन करती हूँ नमन! लहरते पतंग बिखरते तरंग...

  • बेटी

    बेटी

    बेटी निराली लगती बड़ी प्यारी है बड़ी न्यारी! ……………….. नन्ही कली ने जब आँगन आई बाजे बधाई! …………….. घर आँगन खिली उपवन से लगते प्यारे! ……………… फूलों सा सीचा सर्व गुण भरके नन्हीं परी को! ………………...

  • तमन्ना

    तमन्ना

    आरजु मेरी दिल की तमन्ना  है मिल के रहो! ……………… जीवन के ये अनमोल पल को हँस के ज़ियो! …………… ज़िंदगी एक किराये का धर है फुलते रहो! ……………… प्रेम का दीया मन मे जलाकर खिलते रहो!...