कविता

श्रावण मास पवित्र है

श्रावण मास पवित्र है झर झर बरसे नीर शिवशंकर अविनासी है करत दुखों के दूर। भांग धतूरा खात है रहत सदा मतवाल अपने भक्तों को निज करत सदा उद्धार। वर्षा बरसे बिजली चमके श्रावण मास में शोर मचावे कावरिया की भीड़ लगी मुख से निकले बम का जयघोष। बाबा करते है उद्धार शरण में आए […]

हाइकु/सेदोका

हाईकू

प्रीत मिलन मधुरमय बेला करे पुकार! नई उमंग मन मे है तरंग हुई मगन ! सुनी डगर निहारते सनम मिले कदम! लोग बेगाने बने इस तरह मिले सबक! अजनबी ये मन करता दुआ शुक्रिया तेरा? बिजया लक्ष्मी

कविता

किस कदर करवां का भी जाना हुआ

किस कदर चाँद तारों का आना हुआ, किस कदर कारवाँ का भी जाना हुआ, हम जमाने की कलियाँ , खिलाते गये, हर जमाने मे कोई मुक्कदर बना किस कदर कारवाँ का भी जाना हुआ.! ऐसी भोली सी सूरत कहाँ छुप गयी सुनने वालों का दिल भी थम सी गयी हर नई एक कलियाँ संयोजे हुए […]

कविता

प्रभु एक आश है तेरी

लिखी तक़दीर में क्या खूब कभी समझ नही आती अपने दूर चले गए नादानी समझ नहीं पाए! जब मैं थी एक गुड़िया थे सबके आंचल के छांव आज वो दिन भुल गए अपने दूर चले गए! आज बिखर गए क्यों सब दिल में वैमनस्यता लिए हुए बस पश्वताप का दीपक मन में जला गए! प्रभु […]

कविता

मां

तेरे तन्हाईयों का दर्द मां मैं कैसे सहू तेरे बिन तेरे रुसवाइयों का डर मां किसी गम से कम नही। चाहें तू लाखं जरुरते पूरी कर दे मां पर सब बिखर जाते है सिर्फ तेरे बिन मां। चाहे तू कोई हमसफ़र चुन दें मेरे लिए मां पर तेरी कमी को पूरा कोई कर नहीं सकता। […]

कविता

प्रियतम तेरी याद आई

सपनों की दुनिया में सपनों की तलाश में भींगी भींगी रातों में भींगी भींगी बाहों मैं प्रियतम तेरी याद आई। चांदनी रातों में तारों के बारातों में जुगनू के प्रकाशों में झूमती पुष्प लाताओं में प्रियतम तेरी याद आईं। घुमड़ते हुए बादल में वर्षा के फुहारों में बसंती बयार में पलकों के छाव में प्रियतम […]

कविता

होली

होली फागुन चैत बयारआया रंगो का त्योहार लाया। मौज मस्ती साथ लायी देखो बच्चें होली आयी! रंग – बिरंग पिचकारी आया बच्चों को खूब मन भाया! रंगो का त्योहार है होली देखो बच्चे होली आयी! अबीर गुलाल का थाल सजाकर एक दुसरे को लाल लगाकर! खुशियाँ छवि निराली लगती देखों बच्चे होली आयी! पुआ पकवान […]

कविता

तितली बनू

तेरी राहों मे तितली मैं बनकर चली तेरी बाहों मे आहें मैं भरकर सोई तुझे अपने दिल की आरमा बताने चली तुझे यादों की कीमत चुकाने चली तेरी राहों मे तितली मैं बनकर चली हर सुबह याद आये हमे ख्वाबों में हम हाथों में हाथ बढ़ा कर चलें हर जनम साथ दू़गीं ये वादा मेरा […]

कविता

कविता

ये दुनिया की कैसी रीत है जहाँ लोग लड़ते रहते है किसका क्या है कितना है इन सब बातों पर मनमुटाव करते रहते है ये भाई – भाई भी आपस मे जयदाद के लिए लड़ते है! मेरा तो मानना है कि लोगों मे बँटवारा सिर्फ जायदाद की नही होती है रिस्तों की बटवारा होती है दिल और दिमाग की बँटवारा होती है संबधों की […]

कविता

कविता

बर्षा की फुहारो से पानी की झनकारो से हवा -भरी तुफानों से गरज-गरज कर घुमड़ रहे है रिमझिम – रिमझिम बरसे सावन! धुल भरी पतवारो से सुगंधित पुष्प लताओ से लता ओट मे छिपकर के झम-झम करके अवनि पर रिमझिम – रिमझिम बरसे सावन! खेत-क्यारियाँ सजी हुई हैं हरा चादर ओढ़ी हुई हैं नदी तालाब […]