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  • पलाश के रंग

    पलाश के रंग

    ऋतुराज वसंत के आगमन से प्रकृति जब रंगीन होने लगती है और फाल्गुन के आते ही वासंती रंग की धानी चुनरिया ओढ़ चुपके से उसे फाल्गुनी बना देता है | तब प्रकृति होली की हुड़दंग और...

  • गोधूलि बेला

    गोधूलि बेला

    दिन ढल गया देखो आई शाम कितनी सुहानी सूरज की रक्तिम लाली भी छिप गई देखो बादलों के पीछे धीरे -धीरे होने लगी साँझ मंद -मंद बहे हवा पुरवाई कितना सुहाना लगे ये मौसम देखो आई...

  • दाग़

    दाग़

    ‘देख न कमली ..मेरे सलवार पर कुछ दाग लग गया है’, पहली बार माहवारी आने पर बालिका विद्यालय में पढ़ रही छात्रा कुसुम डरी और सहमी अपनी सहेली से बोली … ‘मैं जल्दी से अपने घर...

  • सच्चे आभूषण

    सच्चे आभूषण

    एक बालक प्रतिदिन अपने विद्यालय पढ़ने जाता था | उसके घर में अपने बेेटे पर प्राण न्योछावर करनेवाली एक प्यारी और सरल हृदयवाली एक माँ थी , जो अपने प्यारे बेटे की हर मांग पूरी करने में बहुत...

  • होली आई रे

    होली आई रे

    ‘धनि -धनि भाग हमार फागुनवा कुछ बोलली’ भोजपुरी गीत की ये धुन हमारे पड़ते ही फागुन में कुछ और फगुनाहट घोलकर हरियाते बासंती बयार संग होली के रंग की मादकता घोल जाता है | ऋतुराज वसंत...

  • दुर्गा दुर्गति नाशिनी

    दुर्गा दुर्गति नाशिनी

    नमो दु्गा दुर्गति नाशिनी  अर्थात जो दुर्गति का नाश करती हैं वही आद्याशक्ति माँ दुर्गा हैं |’ जागो दुर्गा , जागो दशोप्रहर धारिणी माँ …, जागो… तुमि जागो…, जागो चिन्मयी जागो मृन्मयी , तुमि जागो माँ…...

  • शिवमय है सावन 

    शिवमय है सावन 

    कहते हैं सृष्टि के कण – कण में ईश्वर का वास होता है और ये हमारी आस्था ही  है जिसके कारण हम उनके दिव्य स्वारूप का दर्शन कर पाते हैं | श्रावण मास आशुतोष भगवान शंकर...



  • माँ का स्पर्श 

    माँ का स्पर्श 

    कहते हैं हर माँ अपने बच्चे की सबसे बड़ी हकीम होती है | जब एक बच्चा जहां भर की परेशानियों से जूझकर घर आकर अपनी माँ की गोद में अपना सिर रखता है और माँ जब...