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  • तासीर

    तासीर

    “मैंने तेरी माँ का पल्लू थामा था न कि साथ लाये खिलौने को भी पालने का ठेका लिया था।” उनके कहे शब्द अभी भी उसके जहन में थे। ……… सौतेले होने का दंश पिता के कटु...


  • मोह-पाश

    मोह-पाश

    मोह-पाश सुबह से ही कशमकश में था बिप्ति। आखिरकार उसने ‘अखबार’ को होटल के फर्श पर फेंक दिया और मन में बढ़ते तनाव से मुक्त होने के लिए कमरे की खिड़की को खोल दिया। एक ठंडी...

  • वापसी

    वापसी

    “कुछ भी नही बदला सात वर्ष में, यहां तक कि मेरे हाथ का लगाया बगीचा भी।” सोचते सोचते रवि ने ‘डोर बैल’ पर हाथ रख दिया। इतने अर्से बाद अचानक पति को सामने देखकर निशी समझ...


  • पिता का घर

    पिता का घर

    आखिरकार अंतिम बस भी निकल गयी लेकिन राज नही आया। जाने कितनी देर से वह उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। आज वह उसके लिये अपने पिता का घर भी छोड़ आई थी। उसने राज को सब...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    “भाई ! जरा चौक वाले डॉक्टर के क्लीनक चलना है।” कहते हुए वो दोनों बाते करते हुए रिक्शे में बैठे गए। “इनकी बातो से लग रहा है जैसे पति पत्नी से सहमत नहीं है पर इसका...

  • वफ़ा के दायरे

    वफ़ा के दायरे

    “बख्श दे ख़ता, गर ख़ता की सजा है ये जिंदगी। दुआ या बददुआ, अब सही नहीं जाती ये जिंदगी।” खाने की ओर नजर भर देख उस्मान मियां ने खुदा की इबादत में हाथ ऊपर उठा दिए।...