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  • मोह का दीया

    मोह का दीया

    शाम ढलने लगी थी लेकिन पिछले दो पहर से बंगले के बाहर एक पत्थर पर बैठे बिप्ति के मन में, चौकीदार के बार बार मना करने के बावजूद अभी भी आस का दीया जल रहा था...

  • कोशिश

    कोशिश

    “माँजी! मन तो हमारा भी नहीं कर रहा कि आप लोगों को छोड़ कर जाएँ लेकिन…..” अपनी बात अधुरी ही छोड़ तनु, पुरू को साथ ले माँ के चरणों में झुक गयी। “मैं समझ रही हूँ...



  • तासीर

    तासीर

    “मैंने तेरी माँ का पल्लू थामा था न कि साथ लाये खिलौने को भी पालने का ठेका लिया था।” उनके कहे शब्द अभी भी उसके जहन में थे। ……… सौतेले होने का दंश पिता के कटु...


  • मोह-पाश

    मोह-पाश

    मोह-पाश सुबह से ही कशमकश में था बिप्ति। आखिरकार उसने ‘अखबार’ को होटल के फर्श पर फेंक दिया और मन में बढ़ते तनाव से मुक्त होने के लिए कमरे की खिड़की को खोल दिया। एक ठंडी...

  • वापसी

    वापसी

    “कुछ भी नही बदला सात वर्ष में, यहां तक कि मेरे हाथ का लगाया बगीचा भी।” सोचते सोचते रवि ने ‘डोर बैल’ पर हाथ रख दिया। इतने अर्से बाद अचानक पति को सामने देखकर निशी समझ...


  • पिता का घर

    पिता का घर

    आखिरकार अंतिम बस भी निकल गयी लेकिन राज नही आया। जाने कितनी देर से वह उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। आज वह उसके लिये अपने पिता का घर भी छोड़ आई थी। उसने राज को सब...