धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

गोमाता, गोदुग्ध एवं गोरक्षा का महत्त्व

ओ३म्     ज्ञान व विज्ञान की चरम उन्नति होने पर भी मनुष्य आज भी आधा व अधूरा है। आज भी उसे बहुत सी बातों का ज्ञान नहीं है और आधुनिक विज्ञान की उन्नति ने उसे इतना अधिक अभिमानी बना दिया है कि वह किसी सत्य बात को भी मानना तो दूर, उसे सुनना भी […]

राजनीति

आगामी वर्ष 2016 में पूरे होंगे सपने या फिर ?

उम्मीदों और आशाओं का दीप जलाता एक वर्ष बीत रहा है। हर वर्ष के अंतिम दिनों में समाज के सभी वर्गों के लोग अपना वार्षिक लेखा- जोखा याद करते हैं और अगले वर्ष का कैंलेंडर तैयार करते हैं । समाज के सभी लोग पिछले वर्षों में जो कमी रह जाती है उसे नये आगामी वर्ष […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

उपासना क्या, क्यों व किसकी करें तथा इसकी विधि?

ओ३म्   उपासना का उल्लेख आने पर पहले उपासना को जानना आवश्यक है। उपासना का शब्दार्थ है समीप बैठना। हिन्दी में हम अपने परिवार, मित्रों व विद्वानों आदि के पास बैठते हैं परन्तु इसे कोई उपासना करना नहीं कहता, यद्यपि यह उपासना ही है। उपासना शब्द सम्प्रति रूढ़ हो गया है और इसका अर्थ जन […]

राजनीति

अब तो शर्म करो केजरीवाल

एक समय था, जब अरविन्द केजरीवाल अन्ना हजारे के प्रतिबिंब माने जाते थे। अन्ना आन्दोलन के दौरान आईआईटी, चेन्नई में उनका भाषण सुनकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि उनका प्रबल प्रशंसक बन गया। अन्ना ने यद्यपि घोषित नहीं किया था, फिर भी भारतीय जन मानस उन्हें अन्ना के प्रवक्ता और उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सर्व मत-पन्थों का समन्वय ही मनुष्यों के सुखी जीवन एवं विश्व-शान्ति का आधार

ओ३म् मनुष्य के व्यवहार पर ध्यान दिया जाये तो यह सत्य व असत्य का मिश्रण हुआ करता है। जो मनुष्य सत्य व असत्य को जानता भी नहीं, वह भी सत्य व असत्य दोनों का मिला जुला व्यवहार ही करता है। शिक्षित मनुष्य कुछ-कुछ सत्य से परिचित होता है अतः जहां उसे सत्य से लाभ होता […]

सामाजिक

स्वभाषा और लिपियों पर गहराया संकट

स्व-भाषाओं को मुक्ति चाहिए-अंग्रेजी के साम्राज्यवादी षड़यंन्र से नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए डेढ़ साल हो गया है। वे चुनाव में पूरे देश में मतदाताओं से हिंदी में बोले थे। मतदाताओं को हिंदी में उनकी बातें समझ में आई। उन्हें लोकसभा में बहुमत मिल गया था। अगर अँग्रेजी में भाषण देते, तो […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति लेख

२५ दिसंबर यानी बड़ा दिन!

२५  दिसंबर यानी बड़ा दिन! बड़ा दिन का काम भी बड़ा होना चाहिए. कहते हैं जाड़ों में दिन छोटे हो जाते हैं और भौगोलिक गणना के अनुसार २२ दिसंबर को सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात होती है. यानी कि २३ दिसंबर के बाद दिन फिर से बढ़ने लगता है. पर ठंढ में यह […]

इतिहास

शहीद ऊधम सिंह जी की जयंती पर उनकी देशभक्ति के जज्बे को प्रणाम

आज देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले देशभक्त अमर शहीद श्री ऊधम सिंह जी की 116 वीं जयन्ती है। शहीद ऊधम सिंह जी ने मानवता के इतिहास की एक निकृष्टतम नरसंहार की घटना जलियावाला बाग नरसंहार काण्ड के मुख्य दोषी पजांब के तत्कालीन गर्वनर माइकेल ओडायर को लन्दन में जाकर 13 […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

व्रत, तप, तीर्थ व दान का वैदिक सत्य स्वरूप

ओ३म् भारत में सबसे अधिक पुरानी, आज भी प्रासंगिक, सर्वाधिक लाभप्रद व सत्य मूल्यों पर आधारित धर्म व संस्कृति ‘‘वैदिक धर्म व संस्कृति” ही है। महाभारत काल के बाद अज्ञान व अंधविश्वास उत्पन्न हुए और इसका नाम वैदिक धर्म से बदल कर हिन्दू धर्म हो गया। हम सभी हिन्दू परिवारों में उत्पन्न हुए और हमने […]

राजनीति

देश का वर्तमान

कविवर बिहारी कोई बिहार प्रांत के नहीं थे और न ही आज कोई भी उन्हें बिहार प्रांत की सीमा के मातहत बाँधने को तैयार दीखता है | वे राष्ट्र की सीमा से भी परे विश्व के उस परिकल्पना “वसुधैव कुटुम्बकम” के एक सजग और निष्पक्ष प्रहरी के रूप में मान्यता प्राप्त जनकवि और संत के […]