खुशी के आसूं
सुमी चाहे घरेलू सहायिका थी, अपने बच्चे अनूप को स्वयंसिद्ध बनाया था सुमी ने। अनुशासित जीवन था उसका। सुबह परम
Read Moreसुमी चाहे घरेलू सहायिका थी, अपने बच्चे अनूप को स्वयंसिद्ध बनाया था सुमी ने। अनुशासित जीवन था उसका। सुबह परम
Read Moreजगततारिणी माँ, जगदंबे माँ, रिद्धि, सिद्धि दात्री सुहासिनी मां, भक्ति दो, शक्ति दो, हमें साहस दो,, ज्ञान गागर माणिक मोती
Read Moreपुण्य कर्म जब उदयित होते, जीवन निज सार्थक होता, मानवता ही धर्म मनुज का, सहज मिटे भव-भव गोता, पूजन, वंदन,
Read Moreदोनों भाई एक दुसरे के साथ-साथ ही अपनी कंपनी में जाते। बडा अनीश, छोटा रोनीश। माता सुलोचना देवी अपने लाडलों
Read Moreरात के दस बज रहे थे की जोरों की शोर सुनाई पड़ी, दौड़ कर खिड़की से झांकने पर देखे मेरे
Read Moreमेरा ये भावहै तेरा प्रभाव,बिन तेरे जैसेलागे आभाव। कैसा लगाव,कितना जुड़ाव,थके पथिक कोमिले शीतल छाँव। कभी ऐसा लगेजैसे गये थे
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