कविता

उसकी आँखों का तारा हूँ मैं

उसकी आँखों का तारा हूँ मैं

इस आशा से
रोज लौटता हूँ स्कूल से घर
मेरी माँ कर देगी
मेरे सारे कठिन प्रशनों को हल
मेरी माँ का ह्रदय
फिर भी बहुत हैं सरल
मेरा रखती हैं ख्याल वह हर पल
खेल खेल में चोट मुझे लगती हैं
तो उसके चेहरे पर
दर्द आता है उभर
मै अक्सर
झूठ मुठ रोता इसीलिए हूँ
ताकि मेरे आंसूओं को मेरी आँखों से
हटाये उसका नरम आँचल
उसकी आँखों का तारा हूँ मैं
चाहती है मैं उसकी नजरों से
कभी न होऊं ओझल

 

kishor kumar khorendra

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

2 thoughts on “उसकी आँखों का तारा हूँ मैं

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत खूब !

  • कविता ने मुझे मेरी माँ की याद दिला दी .

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