कविता

कुछ तो नूतन करो यार !

कुछ तो नूतन करो यार !
गोमती की जल धार पुकार रही ,
हर पल इसको साफ रखो ,
नालों का रुख मोड़ दो!
मिलों के जल को दूर करो ,
मछली जिसका ऋण बाकी है ,
स्वच्छ जल की धार भरो,
कुछ तो नूतन करो यार !
जीवन को दो अपना उपहार,
कुछ तो नूतन करो यार !

– ‘मौन’

One thought on “कुछ तो नूतन करो यार !

  • विजय कुमार सिंघल

    बढ़िया. गोमती में प्रदूषण पर आपकी चिंता हम सबकी चिंता है. गोमती ही नहीं देश की सभी नदियों का यही हाल है. औद्योगीकरण ने विकास के साथ-साथ विनाश का सामान भी दिया है. इस विनाश को रोकना हम सबका कर्तव्य है.

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