गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिले जज्बात का हरदम मचलना भी जरुरी था

गमों की आँधियों का तब बदलना भी जरुरी था

बहुत ही दर्द देती है यहाँ पर तन्हाई मुझको

दिले जज्बात का मसलन पिघलना भी जरुरी था

नजर में यूं नहीं आते यहाँ अहले वफा कोई

खुदाई के लिये तन्हा पिघलना भी जरुरी था

सनम की याद में मुझको है जलना हर वखत यारों

बसर यादें लिये शबनम संभलना भी जरुरी था