कविता

कविता

धरा …
खामोशी सी ओढ़े जीवन देती जाती ,
जो सहती बहुत कुछ पर फिर भी ,
सहनशीलता से यूंही बढ़ती जाती ,
अपनी धुरी पर चली जाती यूंही ,
कहीं मौसम से रूबरू कराती ,
कहीं दिन रात यह बनाती ,
कहीं हलचल हो जाए इसके भीतर,
डोल जाए समस्त जनजीवन ही ,
कितने ही उतार चढ़ाव यह सहती ,
जाने कितनी सदियां यूंही बीत जाती,
फिर भी अपनी दिशा में चली जाती ,
खुद का ना कभी एहसान जताती ,
अपने अंदर कंई राज़ यह समेटती ,
बस यूंही अपना अस्तित्व बनाती,
कामनी गुप्ता ***

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

One thought on “कविता

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    सुंदर

Comments are closed.