मानसिक कुंठा
मानव मन
विकृत स्वरूप
अहम क्षीण मानसिकता
सोचने का नज़रिया
खुद की तारीफ़ पसन्द
मानसिक ईर्ष्या का ज्वर
अनिर्णायक क्षमता
का वीभत्स रूप
अहम चरमोत्कर्ष
अप्रत्याशित घटना
भूलते रिश्ते
जुनून का सैलाब
खून की होली
या मानमर्दन
पागलपन
सुसुप्त मानसिकता
ज्ञान शून्यता
नेत्र होते हुए
नेत्रहीन
अहंकार की पराकाष्ठा
सुलगता अहम
धधकती ज्वाला
संग मे पत्नीक
अग्नि देव
स्वाहा स्वाहा
हो जाता है तबाह
फिर नहीं रुकता
अहम का तांडव
पुन पाश्चाताप
अशेष खुद
फिर क्या
सोच
निर्णायक फ़ैसला
खुदकुशी आत्म हत्या
सोचना
सुनना
देखना
वेदना
अथाह सागर
कुंठा
दिल को दहला देती है
सावधान
योग्य मनोचिकित्सक
करें आपका निदान
बचें इस अभिशाप से
— राजकिशोर मिश्र ‘राज’
