कविता

मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया

जात रहे परदेश कहे तब लाग लुगाइया
मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया
न सोना ना चाँदी लेबाइ न करिबे शृंगार
रूखी सूखी रोटी अमृत प्यारा घर परिवार

मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया

चैत की खेती अरु खलियानवा , रहिबे पियवा साथ
बाग बगीचा अमराई मे खाबे खूब टिकोरा
महुआ की बूँदी बिन करके हालुआ खूब बनाउब
गरम -गरम हालुआ हम खबा इ पियवा खूब रिझा उब
मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया

गरमी से खूब चुवे पसीना – बेना रोज डोला उब
भूल से प्रियतम कबहु कह्बहि-ए सी ना मग़वा उब
बढ़ती गरमी भ यि बरसात बेहन खूब लगा उब
धान की हरियाली मे पियवा सुख को रोज रिझा उब
मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया

राजकिशोर मिश्र ‘राज’

राज किशोर मिश्र 'राज'

संक्षिप्त परिचय मै राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी कवि , लेखक , साहित्यकार हूँ । लेखन मेरा शौक - शब्द -शब्द की मणिका पिरो का बनाता हूँ छंद, यति गति अलंकारित भावों से उदभित रसना का माधुर्य भाव ही मेरा परिचय है १९९६ में राजनीति शास्त्र से परास्नातक डा . राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से राजनैतिक विचारको के विचारों गहन अध्ययन व्याकरण और छ्न्द विधाओं को समझने /जानने का दौर रहा । प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश मेरी शिक्षा स्थली रही ,अपने अंतर्मन भावों को सहज छ्न्द मणिका में पिरों कर साकार रूप प्रदान करते हुए कवि धर्म का निर्वहन करता हूँ । संदेशपद सामयिक परिदृश्य मेरी लेखनी के ओज एवम् प्रेरणा स्रोत हैं । वार्णिक , मात्रिक, छ्न्दमुक्त रचनाओं के साथ -साथ गद्य विधा में उपन्यास , एकांकी , कहानी सतत लिखता रहता हूँ । प्रकाशित साझा संकलन - युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच का उत्कर्ष संग्रह २०१५ , अब तो २०१६, रजनीगंधा , विहग प्रीति के , आदि यत्र तत्र पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं सम्मान --- युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच से साहित्य गौरव सम्मान , सशक्त लेखनी सम्मान , साहित्य सरोज सारस्वत सम्मान आदि

5 thoughts on “मत जाओ परदेश पिया निक इह इ म डाहिया

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    माने कि नहीं 🙂
    रचना में अभिव्यक्ति उम्दा

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      बहन जी आपके आत्मीय स्नेहिल पसंद प्रतिक्रिया के लिए आभार संग नमन

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      बहन जी आपके आत्मीय स्नेहिल पसंद प्रतिक्रिया के लिए आभार संग नमन

  • लीला तिवानी

    अति सुंदर प्रस्तुति.

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      आदरणीया बहन जी प्रणाम — त्वरित प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार

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