गीत/नवगीत

गीत : मन से मन मिलना अब सबसे मुश्किल है

मन से  मन  मिलना अब सबसे मुश्किल है ॥

अपनों से चोरी रखते गैरों से मिलते
भेद-भाव की खेती कर, हैं उगते-खिलते

दिल से दिल मिलना अब सबसे मुश्किल है ॥

मूक बधिर की सेना है लड़ने को तत्पर
दिवस हुआ बेचैन मौन साधे है दिनकर

सुख से सुख लिखना अब सबसे मुश्किल है ॥

गुणवत्ता   खोई   भाती है लीपा -पोती
खरी -खरी  सुनने  मॆं हैं आशायें रोती

सूरज -सा दिखना अब सबसे मुश्किल है ॥

कल्पना मनोरमा

जन्म तिथि 4/6/1972 जन्म स्थान – औरैया, इटावा माता का नाम- स्व- श्रीमती मनोरमा मिश्रा पिता का नाम- श्री प्रकाश नारायण मिश्रा शिक्षा - एम.ए (हिन्दी) बी.एड कर्म क्षेत्र - अध्यापिका प्रकाशित कृतियाँ – सारंस समय का साझा संकलन,जीवंत हस्ताक्षर साझा संकलन, कानपुर हिंदुस्तान,निर्झर टाइम्स अखबार में,इंडियन हेल्प लाइन पत्रिका में लेख,अभिलेख, सुबोध सृजन अंतरजाल पत्रिका में। हमारी रचनाएँ पढ़ सकते हो । लेखन - स्वतंत्र लेखन संप्रति - इंटर कॉलेज में अध्यापन कार्य । सम्मान - मुक्तक मंच द्वारा (सम्मान गौरव दो बार )भाषा सहोदरी द्वारा (सहोदरी साहित्य ज्ञान सम्मान) साहित्य सृजन - अनेक कवितायें तुकांत एवं अतुकांत,गजल गीत ,नवगीत ,लेख और आलेख,कहानी ,लघु कथा इत्यादि ।

3 thoughts on “गीत : मन से मन मिलना अब सबसे मुश्किल है

  • लीला तिवानी

    अति मनोहारी गीत.

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छा गीत !

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छा गीत !

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