कविता

एक ही दवा

खिलते हैं फूल नित्य
खुशियाँ बढ़ाने के लिए
मिलते है दर्द भी
सबक सिखाने के लिए।
जख्म को कभी नासूर न बनने देना
गर दर्द बढ जाए
दो लब्ज जीवन का पढ़ लेना
हौसला और मुस्कुराहट से लड़ लेना
हँसी ही एक दवा है
हर दर्द मिटाने के लिए।
सबक तो सबक है
हर कदम पर मिल जाएँगे
सीखने की कोशिश में
हर रोज नये शिक्षक मिल जाएँगे
गौर से देखोगे
कई अपने भी शामिल होंगे
पर जरूरी नहीं कि
सभी तुझे सिखाएँगे
आजकल तो कई
होते हैं मखौल उड़ाने के लिए।
अनुभव होता नही
गमों को पढ़ने की
हसरतो के समन्दर में
तूफान उठता ही रहता है
एक चूक हो जाती अगर
जीवन बच जाती है
पछताने के लिए।
सफर के रास्ते है बडा कठिन
पग पग पर काटो को
देखकर चलना कहां रहता बस में
जीवन का सजाया जो गुलदस्ता
वह औरो के लिए कितना सस्ता
छोड मत देना ऐ जीवन के माली
मुरझाने के लिए।
आशुतोष, पटना बिहार

आशुतोष झा

पटना बिहार M- 9852842667 (wtsap)