लेखसामाजिक

महिला सशक्ति : किन्तु शक्तिशाली हुई महिलाएँ !

वरिष्ठ संपादक मृणाल पांडे का लेख ‘महिला सशक्तिकरण की स्याह तस्वीर’ वर्त्तमान सरकार के प्रति उनके पूर्वाग्रह को ही दर्शाता है । मैं उनसे पूछता हूँ कि क्या भारत के इतिहास में ऐसा प्रथम बार नहीं हुआ कि सभी महिला कर्मचारियों को 6 मास का मातृत्व अवकाश मंजूर हुआ, अब से पहले 3 माह की छुट्टी होती थी । तब गर्भवती महिला गर्भकालीन अवस्था में भी अपनी ड्यूटी में लगी रहती थी…… लेखिका को पूर्वाग्रह का चश्मा हटाकर वास्तविकता को देखना चाहिए ।

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‘होली’ भारतीय परंपरा में आनंद का पर्व है । यह ‘बसंत’ ऋतु में मनाया जाता है । प्रकृति नए पत्तों और फूलों से सजकर तैयार रहती है । हवाएं मयूर जैसे नाच उठते हैं । किसान रबी फसलों की कटनी और दौनी करते हैं  जन – मन पुलकित हो उठता है…… हमें शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.