कविता

मै देश बदलने निकला हूँ

रुख हवाओ का मोड़ने,
गुरुर आंधियो का तोड़ने निकला हूँ,
धार कलम की तेज किये ,
मै देश बदलने निकला हूँ।
जवानों जैसा कुछ कर पाऊ,
ऐसी मुझमे बात नही,
गुण शहीदों के मैं बतलाऊ ,
ऐसी मेरी औकात नही।।
सत्ता के खातिर लोगो को,
बदलते मेने देखा है,
स्वार्थ के खातिर,
गधे को भी बाप बनाते देखा है।।
आज की युवा शक्ति के मन मे,
ऐसी व्यर्थ आग ना लगाओ,
जो देश की नींव हिला दे,
तूफान ऐसा उनमे ना भड़काओ ।।
करना ही है तो कुछ ऐसा करो,
महंगाई पर तुम वार करो,
बढ़ती भ्र्ष्टाचारी के आगे,
ईमानदारी से सवाल करो।।
सिर किसानों का अब,
उस फंदे में जा ना पाए,
जो पुण्य उगाया है उसने ,
फल उसका उसे भी मिल पाए।।
अब बहुत हुआ है हिन्दू मुसलमान,
भारत माँ को अब प्रणाम करें,
अपने अपने हिस्से का भारत,
खुशी खुशी पुननिर्माण करे।।
देशभक्ति की लोगो के मन मे,
मै आग लगाने निकला हूँ,
धार कलम की तेज किये,
मैं देश बदलने निकला हूँ।।

अमन न्याती

पता- शंभूपुरा जिला- चित्तौड़गढ़ (राज) पिन कोड- 312612 मो:- 8949080407