मुक्तक/दोहा

दिलखुश जुगलबंदी- 31

किस्मत का बुलंद सितारा

लोग कहते हैं जो दर्द देता है, वही दवा देता है,
पता नहीं फिजूल की बातों को कौन हवा देता है.

हवा देने वाले भी आबाद रहें,
कम-से-कम उनका पता तो मिलता रहता है

मेरी चाहत को मेरे हालात के तराजू में कभी मत तोलना,
मैंने वो ज़ख्म भी खाए है जो मेरी किस्मत में नहीं थे.

जिनसे मिलना किस्मत में ना हो,
उनसे मोहब्बत कमाल की होती है.

जब भी रब दुनिया की किस्मत में चमत्कार लिखता है.
मेरे नसीब में थोड़ा और इंतज़ार लिखता है.

ये कमाल भी क्या चीज है,
कमाल की कमाली भी बेमिसाल होती है

किस्मत बुरी या मैं बुरा, इसका फैसला ना हुआ,
मैं तो सबका हो गया, मगर कोई मेरा ना हुआ.

फैसला ही हो जाए है तो किस्सा तमाम हो जाता है,
वरना उम्मीद का आफ्ताब रोशन रहता है.

मैंने छोड़ दिया है किस्मत पर यकीन करना,
अगर लोग बदल सकते है तो किस्मत क्या चीज है

ज़िंदगी में चुनौतियाँ, हर किसी के हिस्से में नहीं आती,
क्योंकि किस्मत भी, किस्मत वालों को आजमाती है.

“हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है
और “किस्मत” महलों में राज करती है!!

किस्मत उन्हीं को आजमाती है,
जहां उसको किस्मत का सितारा बुलंद दिखता है

किस्मत का सितारा बुलंद हो, तो हाल दिल का अच्छा होता है,
चांद जमीं पर आ जाता है, सूरज की रोशनी से मेल होता है.

(यह दिलखुश जुगलबंदी ब्लॉग ‘किस्मत का खेल! (लघुकथा)” में रविंदर सूदन और लीला तिवानी की काव्यमय चैट पर आधारित है)

 

रविंदर सूदन का ब्लॉग

https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/author/ravisudanyahoo-com/

लीला तिवानी का ब्लॉग

https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/rasleela/

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “दिलखुश जुगलबंदी- 31

  • लीला तिवानी

    इतना वक्त कहाँ है अपनी किस्मत को देखूं
    बस अपनी माँ की मुस्कराहट देखकर समझ जाते हैं कि अपनी किस्मत अच्छी है.

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