गीत/नवगीत

तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी

तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी, मैं भी अर्धांग तेरा हूँ।
तू दिल का राजा, कहती, रानी, मैं तेरा चेरा हूँ।।

नारी ने नर को चलना सिखाया।
नारी ने जन्मा, दूध पिलाया।
नारी बिन, अस्तित्व न नर का,
नारी प्रेम ने, नर को मिलाया।
जब-जब मैं भटका हूँ, पथ से, तूने ही तो टेरा हूँ।
तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी, मैं भी अर्धांग तेरा हूँ।।

नारी प्रेरणा है, हर नर की।
नारी आधार है, इस भव की।
तुझसे ही तो, घर है बसता,
तू ही लक्ष्मी, है घर-घर की।
तू है, मेरे उर की शेरनी, मैं भी तो तेरा शेरा हू।
तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी, मैं भी अर्धांग तेरा हूँ।।

तेरे बिन है, नीरस जीवन।
तू ही साज, तू ही है सीवन।
अधर तेरे अमृत के प्याले,
तू ही प्राण, तू ही संजीवन।
तू ही, मेरे प्राणों की कुटिया, मैं, भी, तेरा खेरा हूँ।
तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी, मैं भी अर्धांग तेरा हूँ।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

2 thoughts on “तू ही अर्धांगिनी नहीं है मेरी

Comments are closed.