राजनीति

ग्रामीण विकास सतत विकास लक्ष्यों की कुंजी है

भारत एक कृषि और ग्रामीण प्रधान देश है यह बात सर्वविदित है  न सिर्फ हम बचपन से यह बात हम अपने पाठ्य पुस्तकों में पढ़ते आ रहे हैं बल्कि आज भी स्थिति जस की तस है! सन 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण भारत की जनसंख्या 68.84 फ़ीसदी है याने लगभग 70 फ़ीसदी अर्थात जनसंख्या का दो तिहाई हिस्सा आज भी ग्रामों में निवास करता है! इसीलिए ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान देना हर सरकार, शासन प्रशासन की प्राथमिकता होना स्वाभाविक भी है!
परंतु कुछ वर्षों पूर्व मीडिया में हमने यह पाया था कि तबके पीएम ने कहा था एक हित यहां से निर्मित होता है और उसका पंद्रह पैसा ही लाभार्थियों तक पहुंचता है! जिसकी चर्चाएं आज भी राजनीतिक स्तरपर समय -समय पर जोर शोर से होती है! परंतु अभी ज़माना बदल गया है, पुराना भारत नए भारत की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। व्यवस्थाएं डिजिटल भारत में परिवर्तित हो चुकी है इसलिए अधिकतम लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट डिपॉजिट (डीबीडी) हो रहा है। परंतु इन योजनाओं का हमें जमीनी स्तरपर याने ऊपर से लेकर स्थानीय निकायों, पंचायती स्तरपर पारदर्शी ज़वाबदेही और कुशल शासन की भागीदारी को आवश्यकता को रेखांकित करना ज़रूरी है क्योंकि आज भी अनेक लाभार्थी इससे अगर वंचित हुए होंगे तो उन्हें एक जनजागरण अभियान और कार्यचलाएं आयोजित कर इस डीबीडी व्यवस्था से जोड़ना ही होगा तथा अधिकारियों की ज़वाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के रास्तों को रोकना होगा! क्योंकि अंतिम स्तर तक कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ लीकेजेस हैं जिसके बल पर सतत विकास लक्ष्यों में धीमी गति का कारण भ्रष्टाचार भी हो सकता है जो संपूर्ण कार्यवाही को पारदर्शी बनाकर सुशासन की आवश्यकता को रेखांकित किया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा दिनांक 11 अप्रैल 2022 को एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी कहा कि, यह देखते हुए कि भारत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्‍सा ग्रामीण भारत है (2011 की जनगणना के अनुसार 68.84 प्रतिशत), राष्ट्रीय स्तरपर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांवों में जमीनी स्तरपर यानी पंचायत स्‍तरपर कार्रवाई करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने ग्रामीण, स्थानीय निकायों को उनके समग्र विकास और राष्ट्रीय विकास तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए सशक्त बनाने हेतु 3 एफ- फंड (निधि), फंक्‍शन्‍स (कार्य) और फंगक्शनेरीज़ (पदाधिकारी) हस्तांतरित करने का आह्वान किया।
उन्होंने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए निधि आवंटन जो 10 वें वित्त आयोग में 100 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष था उसे बढ़ाकर 15 वें वित्त आयोग में 674 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष करने का उल्लेख करते हुए कहा कि धनराशि सीधे उनके खातों में जानी चाहिए और उनमें कोई परिवर्तन, कमी और विचलन नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जनता के लिए दिया जाने वाला हर अनुदान सीधे लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को 17 सतत विकास लक्ष्‍यों (एसडीजी) पर ध्यान केंद्रित करके एकीकृत ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, इन लक्ष्‍यों को गरीबी मुक्त, स्वच्छ, स्वस्थ, बच्चों के अनुकूल और सामाजिक रूप से सुरक्षित, सुशासित गांव सुनिश्चित करने के लिए नौ विषयों के तहत शामिल किया गया है। उन्होंने जमीनी स्तरपर सभी योजनाओं और कार्यक्रमों में जन भागीदारी का आह्वान करते हुए पंचायतों के व्यापक विकास को सुनिश्चित करने और विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी हितधारकों के ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय शासन में लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाने में ग्राम सभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि कुछ ग्राम सभाओं के कानूनी ढांचों का एक वर्ष में एक बार आयोजन आवश्यक है और इसे प्रतिपादित करने की जरूरत है। सभी स्तरोंपर पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल शासन की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने पंचायती राज संस्थानों में स्मार्ट और सुशासन के लिए ई-ग्राम स्वराज जैसे डिजिटल समाधान प्रस्‍तुत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय की सराहना की। यह देखते हुए कि 2.38 लाख ग्राम पंचायतों ने ई-ग्राम स्वराज को अपनाया है। उन्होंने शासन के डिजिटल मिशन को हासिल करने के लिए सभी पंचायतों को इस मंच पर लाए जाने का आह्वान किया।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि देश में ग्रामीण स्थानीय निकायों के निर्वाचित 31.65 लाख प्रतिनिधियों में से 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधानसभाओं और अन्य कानून बनाने वाली निकायों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा, महिलाओं को सशक्‍त बनाना समाज को सशक्‍त बनाना है।यह देखते हुए कि देश को गरीबी से मुक्त बनाना हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है, उन्होंने कहा कि अन्य समान रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्‍यों में सभी लड़कों और लड़कियों को शिक्षा प्रदान करना, महत्‍वपूर्ण सेवा जैसे सुरक्षित पेयजल जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना और पर्याप्त रोजगार के अवसर जुटाना शामिल है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि ग्रामीण विकास सतत विकास लक्ष्यों की कुंजी हैं। सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने स्थानीय निकायों, पंचायती स्तर तक पारदर्शी जवाबदेही और कुशल शासन की आवश्यकता को रेखांकित करना ज़रूरी हैं। भारत का लगभग 70 फ़ीसदी हिस्सा ग्रामीण है। विकास कार्यों की योजनाओं में इस बात को रेखांकित करना समय की मांग हैं!
— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया