लघुकथा

कौशल

धर्मेश डेस्कटॉप कंप्यूटर बेचने का काम करता था. उसको अपना व्यापार संतोषजनक नहीं लग रहा था.
“व्यापारी अपना व्यापार डिजिटल करने की ओर जा रहे हैं, फिर भी मेरा धंधा मंदा क्यों?” वह सोचा करता था.
“एकाउंट फर्म्स, वकीलों,ऑटोमोबाइल डीलर्स और कई अन्य छोटे व्यवसायों में डेस्कटॉप की भारी मांग है. भारी मांग वाले बाजार में भी मैं अच्छा क्यों नहीं कर पा रहा?” मन में मलाल तो होना ही था.
उसने अपने समझदार चाचा जी से तथा मित्रों से राय मांगी. पर कुछ खास हल नहीं मिल पाया.
“रे मना, अपनी समस्या तुझे खुद ही हल करनी पड़ेगी.” उसने अपने मन को मनाया.
कुछ महीनों के विश्लेषण के बाद उसको एहसास हुआ कि वो जिन ग्राहकों को मिलता था, वे उसको गंभीरता से नहीं लेते थे. शायद इसलिए कि उसके पास स्कूटर या बाइक नहीं थी. साइकिल पर आने वाले व्यापारी को कोई गंभीरता से लेगा भी क्यों?
“बाइक खरीदने की मेरी हैसियत तो नहीं है, पर मैं हैलमेट और बाइक जैसी चाबी तो खरीद ही सकता हूं.” ‘स’ से समस्या का उसने ‘स’ से समाधान भी निकाल लिया.
जहां भी जाता बाइक जैसी चाबी टंगा आकर्षक रंगों वाला अपना हैलमेट टेबिल पर रखता और बड़े आत्मविश्वास से अपनी बात रखता.
युक्ति के साथ आत्मविश्वास ने व्यापार में इजाफा कर दिया था.
“मम्मा-मम्मा देखो पापा बाइक लाए हैं.” कहता हुआ धर्मेश का छोटा-सा बेटा पापा की ओर भागा.
धर्मेश की पत्नी बड़ी हसरतों के साथ आई बाइक की आरती उतारने के लिए आरती सजाकर लाई थी.
युवा धर्मेश का कौशल रंग जो लाया था!

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

2 thoughts on “कौशल

  • *लीला तिवानी

    कौशल को विकसित करने पर विशेष जोर—-. .:
    शारीरिक और मानसिक दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए करें विशेष इंतजाम, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को . का आदेश——
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (.) ने उच्च शिक्षा संस्थानों और यूनिवर्सिटीज- कॉलेजों में दिव्यांग स्टूडेंट्स को बिना किसी भेदभाव के क्वॉलिटी एजुकेशन सुनिश्चित करने के मकसद के साथ नई गाइडलाइंस जारी की हैं। यूनिवर्सिटी में दिव्यांगों की पहुंच आसान बनाने के लिए तैयार किए गए दिशा- निर्देशों में करिकुलम में बदलाव, टीचिंग- लर्निंग प्रोसेस से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार समेत करीब- करीब हर पहलू को शामिल किया गया है।

  • *लीला तिवानी

    युवा कौशल दिवस पर विशेष लघुकथा

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