कविता

शतरंज की चाल

हमारी सूझ – बूझ हमारे जीवन को सफल बनाती है ,
सफलता मिलें जिंदगी ! में ,
कभी – कभी  मुझे शतरंज की चाल चलनी पड़ती है।
मैं सोच समझकर निर्णय लेती हूँ ,
नित कदम आगे बढ़ाती हूँ,
कठिन परिस्थितियों में भी! समस्या का समाधान करती हूँ,
जिंदगी में ज़फ़र मिलें,
उसके लिए कभी – कभी मुझे शतरंज की चाल चलनी पड़ती है।
अपनी मंजिल के सफ़र में हारते हुए जीत जाती हूंँ,
हर किसी की प्रेरणा बनती हूंँ,
जिंदगी में कामयाबी के शिखर तक पहुंचने के लिए,
मुझे कभी – कभी शतरंज की चाल चलनी पड़ती है।
देती है जिंदगी ! हमें चुनौती,
मैं उसे हंसकर हर रोज़ स्वीकार करती हूंँ ,
हमारी सूझ – बूझ हमें सफल बनाती है,
जिंदगी ! में विजय प्राप्त करने के लिए,
 कभी-कभी मुझे शतरंज की चाल चलनी पड़ती है।
— चेतना प्रकाश ‘चितेरी’

चेतना सिंह 'चितेरी'

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