कविता

निज देश नहीं झुकने देंगे

हम कदम नहीं रुकने देंगे,
निज देश नहीं झुकने देंगे,
हे भारत मां शत कोटि नमन,
तेरी लाज नहीं लुटने देंगे.

हैं सत्य-अहिंसा के सेवक,
इसे कायरता न कोई समझे,
दुश्मन को संभलने देते हैं,
कमजोरी न कोई इसे समझे.

हम सीमा पार नहीं करते,
अपनी सीमा के प्रहरी हैं,
जब बातों-से-बात नहीं बनती,
हम दुश्मन के तब वैरी हैं.

कायरता का हमला हम पर,
कोई करके तो देखे एक बार,
हम उसको फिर नहीं छोड़ेंगे,
बदला लेंगे हम बार-बार.

आतंक को सहना न्याय नहीं,
अन्याय सहन हम कैसे करें?
जिसे मानवता का मान नहीं,
उस दुश्मन से हम कैसे डरें?

हम सोए नहीं हैं जाग रहे,
मत समझो डरकर भाग रहे,
है विनय हमारे होठों पर,
शोलों-सी हृदय में आग रहे.

हे भारत मां शत कोटि नमन,
तेरी लाज नहीं लुटने देंगे.
हम कदम नहीं रुकने देंगे,
निज देश नहीं झुकने देंगे,
निज देश नहीं झुकने देंगे,
निज देश नहीं झुकने देंगे.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244