सामाजिक

सोशल मीडिया और बच्चे

आजकल के समय में सोशल मीडिया का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है| इससे बच्चों पर भी इसका का प्रभाव पड़ रहा है यदि बच्चों की उम्र छोटी होती है| तो स्मार्ट फोन के आदि होते जा रहे हैं और अपना अधिक समय इनके साथ ही बिताना पसंद करते हैं| वही बच्चों को सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं|
अगर बच्चा किसी कारण से  स्कूल नहीं जा पाता है तो उसकी अगर क्लास छूट जाती है |तो वह सोशल मीडिया की मदद से उसे पूरा कर सकता है| बच्चों की क्लास के ग्रुप बना दिए जाते हैं| जिससे  शिक्षकों से संपर्क कर सकें और छुटी हुए क्लास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें| इसके अलावा शिक्षकों से अपने डाउट्स आदि भी क्लियर कर सकते हैं |करोना काल के समय यह अच्छा उदाहरण साबित हुआ है अगर किसी सवाल का सवाल का जवाब नहीं मिलना है| तो वह यूट्यूब की मदद से इस सवाल की जवाब को समझ सकता है| जिससे लिखने में काफी हद तक मदद मिल जाती है |इसके अलावा फेसबुक के जरिए दोस्त रिश्तेदारों से जुड़कर अपनी पढ़ाई में मदद ली जा सकती है| टीवी के अलावा सोशल मीडिया को भी मनोरंजन का एक साधन माना गया है| जिसके जरिए बच्चे सकारात्मक चीजों को देखकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं| और  अच्छी आदतों को भी अपना सकते हैं| इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से रचनात्मक, और अपनी रुचि के अनुसार बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है| जिससे वह अपनी अलग पहचान बना सकता है| हर सिक्के के दो पहलू होते है सोशल मीडिया से बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है| जैसे बच्चे स्मार्ट फ़ोन पर गेम खेलते है उनका उनके दिमाग पर असर देखा जा सकता है|  सोशल मीडिया का एक और फायदा यह भी है कि यह बच्चों को खुलकर बोलने का मौका देता है| जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चे आज के समय के अनुसार चलते हैं| लेकिन सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव भी हैं जिससे हमें नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं| अगर बच्चा आपके सामने स्मार्ट फोन का प्रयोग करता है| तो आप उसकी रुचि और अरुचि को समझने में काफी हद तक सुविधा मिल जाती है |और आप उस पर नजर भी रख सकते हैं और क्या देख रहा है और किन चीजों में उसकी रुचि है|
इससे उसमें आत्मविश्वास की भावना जाग्रति होती है वह सबके सामने खुलकर बोल सकता है|
सोशल मीडिया के जरिये अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन कर सकता है|[….]
— पूनम गुप्ता

पूनम गुप्ता

मेरी तीन कविताये बुक में प्रकाशित हो चुकी है भोपाल मध्यप्रदेश