गीतिका/ग़ज़ल

दर्द की तासीर मरनी चाहिए।

इस जहां से दर्द की तासीर मरनी चाहिए
मित्र हो या शत्रु हो पर पीर हरनी चाहिए।
स्वर्ग पाऊं या नरक की राह में चलना पड़े,
स्वर्ग जैसी राष्ट्र की तस्वीर बननी चाहिए।
यौन शोषण बाल शोषण दे रहे शर्मिन्दगी,
अब जहां को एक हो तफ्तीश करनी चाहिए
लड़कियों को मानते हैं सब यहां पर देवियां,
देवियों की भांति इनकी लाज रखनी चाहिए।
पूजते हैं देवता मां बाप बेघर कर दिए,
सूरते हालात हर संभव बदलनी चाहिए।
बाप का सम्मान भूले और आदर मात का,
बालकों में अब श्रवण सी सीख भरनी चाहिए।
राष्ट्र को जो लूटते हैं कुर्सियों पर बैठ कर ,
लूटखोरों की जहां में पोल खुलनी चाहिए।
— प्रदीप शर्मा

प्रदीप शर्मा

आगरा, उत्तर प्रदेश