सामाजिक

नकाब

आज के प्रतियोगिता अनुसार दिये गये विषय पर शब्द के अर्थ स्वरूप व अपने भाव अनुरूप भ्रमित हो, मैंने नकाब को अलग भावार्थ संज्ञा देकर अपना आलेख तैयार किया, परंतु खुद के ही भावों का अपने ही अंतर्मन से चल रहे द्वंद के चलते मैंने पुनः विषय पर कलम चलाई। यहां विषय है नकाब- जिसे अलग-अलग रूप में इस्तेमाल किया जाता है नकाब वह है जिससे कि अपना चेहरा ढका जा सके। ताकी अपने चेहरे को प्रदूषण से बचाया जा सके‌। गर्मी में नकाब ओढ़े बहुत से लोग दिख जाऐंगे चाहे तो मर्द हैं या औरतें ताकी लू के थपेड़ों से बचा जा सके पूरी तरह तो राहत नहीं मिल पाती है लू से। तू कुछ हद तक सुकून मिल जाता है और चेहरे पर सीधे पढ़ने वाली सूर्य की तेज किरणें चेहरे पर लगाएं गए नकाब से टकराती हैं जिससे कि हमारी चेहरे की चमड़ी सुरक्षित रहती है वह तेज धूप के थपेड़ों से झुलसती नहीं है। काली भी नहीं पड़ती है। 

नकाब जो कि कुछ धर्मों अनुसार उस धर्म की महिलाओं के लिए एक संस्कार व गहनों से भरा सम्मान भी है जिसे हम पर्दा प्रथा भी संज्ञा दे सकते हैं। नकाब लगाए बगैर कुछ औरतें घर से बाहर निकल ही नहीं सकती है। यदि वो नकाब (पर्यायवाची शब्द बुर्का) पहने बगैर घर से बाहर निकल गई तो यह उनके धर्म के खिलाफ होता है और यह उनके धर्म का अपमान भी कहलाता है। हाल ही में इसी विषय को लेकर कई शहरों में विरोध भी जा जाहिर किया जा रहा है जहां पर महिलाओं को बुर्का पहनकर आने की मतलब नकाब पहन कर आने की अनुमति नहीं दी जा रही है जैसे कि विद्यालय आदि जहां विशेष धर्म की लड़कियां अपने धर्म का पालन करते हुए नकाब पहन कर आने को तैयार हैं परंतु नियम कायदे को सदी के बीच एक समान रखते हुए विद्यालयों द्वारा या महाविद्यालय द्वारा लड़कियों को अनुमति नहीं दी जा रही है। 

नकाब का ही दूसरा पर्यायवाची शब्द जिसे हम घुंघट कहते हैं। घुंघट का नकाब खास करके आज भी हमारे हिंदू धर्म में बहुत सारे क्षेत्रों, राज्यों में देखा जाता है। हमारे हिंदू धर्म की परंपरा अनुसार आज भी गांव में महिलाएं अपने वरिष्ठ को के सामने अपना चेहरा साड़ी के आंचल से लंबा घुंघट निकाल कर ढके रहती हैं और यह घुंघट इनके मरणो उपरांत भी इनके चेहरे पर रहता है। राजस्थान जैसे राज्य में आज भी घुंघट की प्रथा है वहां के परिधान जो कि विशेषकर महिलाओं के लिए बनाए गए हैं चोली घाघरा और साथ ही बड़े-बड़े घुंघट। ऐसा मानना है की घुंघट में रहने वाली स्त्रियां अपनी मर्यादा का पालन करती है और संस्कारवान होती हैं जो महिलाएं इस नकाब का विरोध करती हैं उनके अपने ही धर्म अधिकारी विरोधी हो जाते हैं। महिलाओं से मैं परिचित था जो राजस्थान से हैं। जिन्होंने समाज सेवा के चलते हुए अपने घुंघट का परित्याग कर दिया और उनके परिवार वाले हैं अपने उनके विरोधी होकर उनके खिलाफ घर के भीतर की कार्यवाही करने लगे परंतु महिलाएं नकाब के अंदर रहकर भला कैसे समाज सेवा कर सकती हैं ठीक है परिवार की दहलीज तक अगर वह नकाब लगाकर रखती हैं इससे परिवारों के मान में कहीं से भी कटौती नहीं होती है। फिर भी परिवार के लोग यह बात को समझ नहीं पाते हैं और वह चाहते हैं कि घर की महिलाएं अपने घुंघट में ही रहे अपने सास-ससुर के सामने लंबे लंबे घुंघट निकाल कर कैसे रह पाती होंगी मात्र कल्पना से ही मैं उलझन में पड़ जाती हूं। 

बहुत से लोग ऐसे भी हैं समाज में जो नकाब का प्रयोग बहुत ही अनैतिक कार्यों के लिए करते हैं अनैतिक कार्य जाने अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी बहुत से अपराधी नकाब लगाकर अपना चेहरा छुपाते हुए किसी भी वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं जिसके चलते अपराधी अपराधी कर लेता है और उसका चेहरा समाज के सामने नहीं आ पाता है और वह अपराधी नकाब के चलते हुए एक अपराधी होने के बावजूद भी समाज में निडर भीड़ में घूमता रहता है। 

कुछ वर्षों पहले एक घटना सुर्खियों में आई थी कि किसी शहर के घर में लुटेरे घुस गए थे और उन्होंने काफी लूटपाट मचाई यहां तक कि घर के मालिक को भी उन्होंने मार डाला और सभी लुटेरों के चेहरे पर नकाब लगे हुए थे इसलिए यह कोई नहीं जान पाया कि वह लुटेरे कहां से आए थे और कहां चले गए हो सकता था उन लुटेरों में ही कोई अपना ऐसा दुश्मन छुपा हुआ हो जिसे हम जानते तो हैं परंतु नकाब लगा होने के कारण उसे उस समय पहचान ना पाए। इस तरह की बहुत सारी आपसी गैंग बन गई है या अगर हिंदी में कहा जाए तो अपराधियों की टोलियां बनने हैं जो रात के अंधेरे में चेहरों पर नकाब लगाकर शिकार के लिए घात लगाए बैठे रहते हैं जैसे ही कोई शिकार हाथ लगता है अपने नकाब के आड़ में उसे लूट लिया जाता है। ऐसे लोग अपने दल को नाम तो नहीं देते परंतु दुनिया उन्हें नकाब वाले लुटेरा नाम देकर बुलाते हैं। एक तरफ जहां पर हम नकाब लगाकर सकारात्मक गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं और इससे हम सकारात्मक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। कुछ लोग इसी नकाब का गलत प्रयोग कर कर और नकारात्मकता और फैला रहे हैं। 

नकाब को अगर हम देखा जाए तो अंग्रेजी में मास्क भी कहा जाता है। इसी नकाब मतलब मास्क के चलते ही वर्ष 2019 में आई सबसे बड़ी त्रासदी जिसमें लाखों लोगों ने अपनी जान गवाई वह त्रासदी थी कोरोनावायरस यह वायरस एक ऐसा वायरस है जो कि एक दूसरे के संपर्क में आते ही इंसानों मे तेल पानी जा रहा था। जिसके चलते हमारी भारत सरकार को मिलकर यह निर्णय लेना पड़ा कि भारत देश में लॉकडाऊन लगाया जाए। परिणाम स्वरूप यह हुआ कि सभी इंसानों को बचाने के लिए उनको उनके ही घर के भीतर में कैद कर दिया गया ताकि वह अपनों के बीच रहकर जान बचा सकें। परंतु ऐसी विवशता थी कि इंसान को अपनी जरूरत की सामग्री लेने के लिए घर से बाहर तो निकलना ही पढ़ रहा था जिसके चलते, इसके लिए एक समाधान आया जो पूर्ण रूप से तो नहीं फिर भी काफी हद तक कारगर साबित हुआ और वह समाधान था नकाब मतलब मास्क जो कि चेहरे पर पूर्ण रूप से न सही आधे चेहरे को ढक कर एक दूसरे की सांसो को एक दूसरे में समाहित नहीं होने दे रहा था जिसके चलते कोरोना जेसी महा त्रासदी से थोड़ी सी निजात प्राप्त हुई। इस समय इससे बेहतर नकाब का प्रयोग मैंने हर हिंदुस्तानी के बीच में नहीं देखा है। नकाब के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को अपनी भावनाओं के तहत शब्दों में समा कर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। यदि देखा जाए किसी व्यक्ति द्वारा अपने धर्म के सम्मान के लिए यदि नकाब लगाया जाता है तो यह उसके अपने संस्कार हैं।

कुछ वर्ष पूर्व ही हमारे घर से मात्र दस मिनट की दूरी पर मुत्तु फाइनेंस कम्पनी का आफिस है। जहां नकाब पोश आए और आफिस में लूटपात को अंजाम देकर भाग गये न जाने कितना किलो सोना और नगदी पर हाथ साफ़ कर दिया, इसी तरह आपसी रंजिश के चलते यदि कोई दुश्मन भी अपनी दुश्मनी निकालना चाहे तो वो सर्वप्रथम अपनी पहचान छुपाने के लिए नकाब का इस्तेमाल करता है। नकाब अगर देखा जाए तो एक ओर से लाभप्रद से अगर उसका उपयोग सही रूप से किया जाए जैसे कि संस्कार, संस्कृति, धर्म का सम्मान, आदि। वही दूसरी ओर नुकसान तब होता है नकाब से जब कोई नकाब का इस्तेमाल गलत नज़रिए से करे मतलब कि अपराधिक गतिविधियों को अंज़ाम भी दे दिया जाए और अपराधि ये सोच संतुष्ट रहे की उसे किसी ने पहचाना भी नहीं। यही नकाब जब किसी अपराधिक षड्यंत्र को गति देते हुए लगाया जाए तो यह बहुत बड़ी हानि है मतलब नकाब के कारण यदि अपराधिक गतिविधि हो रही है तो इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे और वह निरंतर इस तरह की अवैधानिक गतिविधियों को अंजाम देते ही चले जाएंगे साथ ही वह किसी के भी हत्थे नहीं चढ़ेगे। 

यदि इसी नाक आपको मैं महा त्रासदी के भीतर सभी को इस्तेमाल करते हुए देख रही थी तो यह नकाब बहुत ही लाभप्रद है जिसके चलते एक इंसान के भीतर चल रही बीमारी उसकी सांसों के द्वारा पर्यावरण में नहीं फैलती जिससे दूसरे इंसान उस बीमारी के चपेट में नहीं आ पाते नकाब के फायदे भी हैं तो नकाब के नुकसान भी हैं अब यह तो इंसान का फैसला है कि उसे उस नकाब का इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए। 

परंतु नकाब लगा वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी यह न सोचें की नकाब लगाकर वह अपराधियों को अंजाम तो दे जाएंगे और पकड़े नहीं जाएंगे बल्कि अब तो बहुत तरह की तकनीक आ गई है। जिसके चलते एक अपराधी को पकड़ना पूरी तरह से तो सरल नहीं हुआ परंतु फिर भी पहले से काफी सरल हो गया है। नकाब लगाकर कोई इंसान कब तक बच पाएगा इसीलिए नकाब का प्रयोग करना भी है तो सही प्रयोग करें उसका दुरुपयोग नहीं करें। 

— वीना आडवाणी तन्वी 

वीना आडवाणी तन्वी

गृहिणी साझा पुस्तक..Parents our life Memory लाकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव दर्द-ए शायरा अवार्ड महफिल के सितारे त्रिवेणी काव्य शायरा अवार्ड प्रादेशिक समाचार पत्र 2020 का व्दितीय अवार्ड सर्वश्रेष्ठ रचनाकार अवार्ड भारतीय अखिल साहित्यिक हिन्दी संस्था मे हो रही प्रतियोगिता मे लगातार सात बार प्रथम स्थान प्राप्त।। आदि कई उपलबधियों से सम्मानित