कविता

प्रभु की भक्ति

प्रभु तेरी साधना करूँ कैसे,

संसार के मोह जाल निकलूँ कैसे,

सबके लिए है वक्त मेरे पास,

भक्ति के लिए नहीं समय पास,

आपके चरणों में रहना चाहती,

संसार के भी अनेक झमेलें ,

आपका ही एक आसरा,

आप से आशीष मैं चाहती,

कैसे सम्भव हो आपसे जुड़े रहना|

माया वैभव छोड़कर भक्ति करना |

कृपा हो तो भवसागर पार करना|

हमारी  ओर भी कृपा दृष्टि रखना|

हम जो थोड़ी सी भक्ति करते है|

आप उससे प्रसन्न हुआ करते है |

चरणों की धूल से सफल जीवन करते है|

हम आपकी हर पल साधना करते है.[….]

— पूनम गुप्ता

पूनम गुप्ता

मेरी तीन कविताये बुक में प्रकाशित हो चुकी है भोपाल मध्यप्रदेश