गीत/नवगीत

अब हम भी बदल जाएंगे।

ख्वाब अधूरे सब रह जाएंगे,
बातें अब हम सुनने न आएंगे,
अब हम भी बदल जाएंगे।

सीमा से परे हालात हो जाएं,
ज़िन्दगी में बस बेरूखी ही पाएं,
हाले दिल किसको सुनाएंगे।
अब हम भी बदल जाएंगे।

उम्र की लकीरें चमकती रहीं,
बेफिक्र फिर भी वो हंसती रहीं,
गम मुस्कान में अब छुपा न पाएंगे।
अब हम भी बदल जाएंगे।

शोर अब कानों को चुभता है,
सवालों का जवाब न सुझता है,
समझदार और न हम बन पाएंगे।
अब हम भी बदल जाएंगे।

तुम हकीकत न समझे गम नहीं,
फासले दरमियाँ अब कम नहीं,
इतनी दूर जा हम न लौट पाएंगे।
अब हम भी बदल जाएंगे।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |