कविता

कविता

हमारा समय

भर गया है घनघोर अंधकार से

अंधेरा इतना घना

कि दिखता नहीं कुछ भी।

वक्त की पगडंडियां

चलते – चलते

थक गया है तन

और मन भी

उदासी को छांटता हुआ।

न जाने क्यों

सूरज की कोई किरण

फूटती नहीं कि

फैल जाये उजाला

और गायब हो जाये

धरती का अंधेरा।

दिखे सब कुछ साफ-साफ

आसान हो जाये

ढूंढना अपनी चीजें

जो खो गयी थी

इस बीहड़

निविड़ तम में।

— वाई. वेद प्रकाश

वाई. वेद प्रकाश

द्वारा विद्या रमण फाउण्डेशन 121, शंकर नगर,मुराई बाग,डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207 M-9670040890