धर्म हो संयम साधक
बालक मन कच्चा घडा, जैसा दो आकार।
सत्यार्थी शिक्षा मिले, विद्या का आधार।।
विद्या का आधार, ज्ञान, कौशल वह पाता।
करें सतत अभ्यास, कीर्ति गौरव सुखदाता।।
करना ऐसा कर्म, धर्म हो संयम साधक।
जीवन की अभिलाष, सफलता पाये बालक।।
बालक मन कच्चा घडा, जैसा दो आकार।
सत्यार्थी शिक्षा मिले, विद्या का आधार।।
विद्या का आधार, ज्ञान, कौशल वह पाता।
करें सतत अभ्यास, कीर्ति गौरव सुखदाता।।
करना ऐसा कर्म, धर्म हो संयम साधक।
जीवन की अभिलाष, सफलता पाये बालक।।