दोहे – योगी
1.
जीवन सादा जो रखे, वह योगी है आप।
मन से करता साधना, हरे पाप संताप॥
2.
निर्मल मधुमय भावना, योगी की है रीत।
जीवन उसका साधना, प्रभु से रखते प्रीत॥
3.
योग साधना रत सदा, अर्जित करता ज्ञान।
चंचल मन को रोकता, योगी उसको जान॥
— लीला तिवानी
1.
जीवन सादा जो रखे, वह योगी है आप।
मन से करता साधना, हरे पाप संताप॥
2.
निर्मल मधुमय भावना, योगी की है रीत।
जीवन उसका साधना, प्रभु से रखते प्रीत॥
3.
योग साधना रत सदा, अर्जित करता ज्ञान।
चंचल मन को रोकता, योगी उसको जान॥
— लीला तिवानी