गीत/नवगीत

लंबी राह का राही हूँ

लंबी राह का राही हूँ, मुझ को चलते जाना है।
मौजी हूँ अपनी हिम्मत का, मेरा नहीं ठिकाना है।

बांधे कफ़न मैं चलता हूँ, किसी से नहीं डरता हूँ।
मुसीबत हैं मेरा साथी, कदम सोच के भरता हूँ।
कांटों से भरा पथ मेरा, मलमल उसे बनाना है।
लंबी राह का राही हूँ, मुझ को चलते जाना है।

जब तक मिले न मंजिल, चलते ही मुझको रहना।
पड़ जाएं पांव में छाले, दुख अपना कभी न कहना।
झुकना नहीं न रुकना मुझे, मन ने यह तो ठाना है।
लंबी राह का राही हूँ, मुझ को चलते जाना है।

आएगी पास यह मंजिल, विश्वास यही है मेरा।
छट जाएगी काली निशा, आएगा नया सवेरा।
क्या कुछ है यहीं हो सकता, कर के मुझे दिखाना है।
लंबी राह का राही हूँ, मुझ को चलते जाना है।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995