बाल कविता

सावन

सावन में अलबेला मौसम
व्रत त्योहारों का लगता संगम
कभी सोमवारी कभी मधुस्रावनी
कभी एकादशी कभी नागपंचमी
नागपंचमी में नागदेवता का
सबमिल जुलकर करते अर्चन
कभी रक्षा बंधन होता
भाई बहन का प्रेम दिखाता
सावन में झूला है लगता
बच्चो को यह खूब मन भाता
मानस मंदिर झांकी निकलता
सब देवों का दर्शन होता।

— विजया लक्ष्मी

*विजया लक्ष्मी

बिजया लक्ष्मी (स्नातकोत्तर छात्रा) पता -चेनारी रोहतास सासाराम बिहार।