कसम खाए हुए हैं
शायद वो दुश्मनी की कसम खाए हुए हैं
जो बेवजह ही बात को उलझाए हुए हैं
सीना तू चीर दे मेरा लेकिन सनद रहे
कई राज़ तेरे इस जगह दफनाए हुए हैं
देता नहीं है साथ कोई बुरे वक्त में
हमने भी सारे दोस्त आज़माए हुए हैं
मात बादशाह की प्यादे के हाथ से
इसलिए वो इस कदर झुंझलाए हुए हैं
किससे करें गिला यहां किस पर धरें इल्ज़ाम
हम लोग तो हालात के सताए हुए हैं
महफिल को लूटने का ख्वाब देखने वालो
तुमको खबर नहीं कि हम भी आए हुए हैं
— भरत मल्होत्रा
