कविता

आजादी के मायने

बदले हैं आजकल आजादी के मायने,

अपने-अपने सजाये सबने शामियाने,

आजादी को समझते हैं वे मनमानी,

स्वच्छंदता की कैसी कलुषित कहानी।।

अभिव्यक्ति की ऐसी मिली आजादी,

संसद में धन-समय की करते बरबादी, 

दोषारोप चाहे हो सच्चे झूठे निराधार,

उत्तेजित होती हैं सकल जन गण आबादी।।

आजादी मिले हमें दुराचारियों से,

आजादी मिले लालची भ्रष्टाचारियों से,

आजादी खुले आसमां में उड़ान की ,

आजादी मिले रूढिवादी परंपरा से।।

न्यायोचित विरोध की आजादी मिले,

सत्याग्रह की आड में न झूठी आस खिले,

महके, चहके बाग हर घर आँगन में,

दीप उजियार मानवता का, धर्म ध्वजा फहरे।।

भूखा-प्यासा, हीन-दीन न रहे कोई, 

जिंदगी खूबसूरत प्रभु वरदान बने,

हर दिल में खुशहाली का स्वप्न सजे,

दुख दर्द, पीड़ा से हमें आजादी मिले।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८