भादवा रखें भरा-भरा
सावन ने किया सखी कितना हरा-हरा,
सदा ही सबको भादवा रखें भरा-भरा,
उत्सवों का लगा है सुंदर “आनंद” मेला,
वर्षा ऋतु का चले संग-संग रेलमपेला ।
सावन में देवाधिदेव भोलेनाथ को ध्याया,
भादवा अपने संग तीज-त्यौहार ले आया,
जन्मे जगद्गुरु कृपालु कृष्ण कन्हाई प्यारे,
सखियॉं सोहर गा लल्ला की नज़र उतारे ।
सात्विक शुभ मंगल कामनाएँ सबकी करें,
गऊ का पूजन प्रेम से बछ बारस को करें,
श्री हरि भगवान की लीला है न्यारी-न्यारी,
मेरे बाल गोपाल को गईया अति ही प्यारी ।
श्री गणेश जी को अपने घर विधिवत् लाएँ,
ढोल, नगाड़े, दुंदुभी, घण्टा जोर-शोर बजाएँ,
प्रेम से भाल तिलक करें बहना भईया को,
रक्षा सूत्र बॉंध बलैया ले ऋषि पंचमी को ।
शुक्ल भादवा तिथि अष्टमी भक्त कीर्तन गाएँ,
राधिका रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएँ,
शुक्ल तिथि द्वादशी वामन प्रभु का करें पूजन,
है अवतार श्री विष्णु के भक्तिमय हो आयोजन ।
हर्षोल्लास दस दिन तक गणेश उत्सव मनाएँ,
विघ्नहर्ता से वैभव, सुख, समृद्धि वरदान पाएँ,
दही और इससे बनी सामग्रियों का करें परहेज ,
भीतर और बाहर से शरीर को अपने रखें सहेज ।
— मोनिका डागा “आनंद”
