बाल कविता

किलकारी

घर में सबसे छोटा बच्चा,
बुद्धि का था मुन्ना कच्चा ,
जब जी चाहे हंसता-रोता,
था पर बच्चा दिल का सच्चा।

गुल्ली-डंडा खेलता खुले में,
ठंडी हवा, आसमान धुले में,
कंचे-खो खो, आटिया-पाटिया,
हंसता मूंगफली-चने-फुल्ले में।

जब मिलता रबड़ी का दोना,
खुश हो मारता वह #किलकारी,
दादी-दादू खुश हो दौड़े आते,
कहते देखो खिली फुलवारी॥

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244