पिता (फादर्स डे)
1.
पिता गगन में धूप हैं, पिता धूप में छांव।
पिता धरा में धैर्य हैं, पिता धैर्य में ठांव।।
2.
पिता हमारा मान हैं, पिता ही हैं सम्मान।
पिता हमारा हर्ष हैं, पिता हमारी शान॥
3.
पिता विचार विमर्श हैं, पिता ही हैं विश्वास।
पिता ही परामर्श हैं, पिता हमारी आस।।
आजादी
1.
आजादी अनमोल है, रखना इसे सहेज।
खून पसीने से मिले, पड़े लुटाना तेज॥
2.
आजादी की राह में, आते कष्ट अपार।
मतवाले जो देश के, पा जाते हैं पार॥
3.
आजादी के तेज में, चमके अपना देश।
खुशियों की आभा रहे, कोई भाषा वेश।
#मातृभूमि
1.
मातृभूमि की कोख से, जन्मे वीर अनेक।
मातृभूमि की शान को, लड़ते सहित विवेक॥
2.
कायम तेरी शान हो, कायम तेरा मान।
तू मेरा अभिमान है, मातृभूमि अहसान॥
3.
मातृभूमि के शौर्य की, कथा न बरनी जाय।
इसका मान बना रहे, हर जन वारी जाय॥
अंत
1.
ठानो अब आतंक का, करना होगा अंत।
हद से ऊपर नीर हो, उलीचो जल तुरंत॥
2.
अंत भला तो हो भला, कहते संत महंत।
कार्य सदा ऐसा करो, खुश हों जग के कंत।।
3.
मौसम कैसा हो भले, लगता उसे बसंत।
प्रीतम हों जब साथ में, हो वियोग का अंत।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
नई दिल्ली
राम
1.
नवमी तिथि श्री राम का, जन्म दिवस है आज।
सुखद अयोध्या लग रही, सुंदर सजते साज॥
2.
राम अवतरित हो गए, खुशी मनाएं आज।
सारा जग खुशहाल हो, सजे खुशी का ताज॥
3.
सजी अयोध्या देखिए, सिया राम के साथ।
कृपा के भंडार हैं, दीन जनों के नाथ॥
नशा
1.
कहा था मत करो नशा, कर देता है नाश।
अब बैठ के भरो खता, हो जब पर्दा फाश॥
2.
नशा नाम से कीजिए, प्रेमिल हो संसार।
अपनापन मन को मिले, खुशियां मिलें अपार॥
3.
नशा नाश का मूल है, होता घर बर्बाद।
होता खर्च फिजूल है, रखना हरदम याद॥
मन
1.
मन ही अपना शत्रु है, मन ही अपना मीत।
पानी है जो जीत तो, मन को लीजै जीत॥
2.
सोच समझकर मानियो, मन की कोई बात।
वरना पक्का जानियो, होगी गहरी घात॥
3.
साहस से महकाइए, मन को प्यारे मीत।
जीवन को चहकाइए, गाकर मंगल गीत॥
धोखा
1.
धोखा कभी न दीजिए, धोखा देना पाप।
धोखे से बचना भला, धोखे से संताप।।
2.
धोखेबाजों से सदा, बचके रहिए मीत।
खो जाएगी मित्रता, नहीं रहेगी प्रीत॥
3.
धोखा देते लोग जो, वैसा हो परिणाम।
बोएंगे जो बबूल तो, कैसे पाएं आम॥
— लीला तिवानी
