दोहे
जलज
1.
जलज नयन श्री राम के, भक्तों के हैं ताज।
जिस मन में श्री राम हैं, प्रभु को उस पर नाज॥
2.
जलज सरोवर में खिले, शोभा बढ़े अपार।
नील सरोरुह श्याम से, जगत रहे उजियार॥
3.
नील #जलज सम नैन हैं, छवि है सुभग ललाम।
मेरे मन में बस रहे, सीतावर श्री राम॥
योगी
1.
जीवन सादा जो रखे, वह योगी है आप।
मन से करता साधना, हरे पाप संताप॥
2.
निर्मल मधुमय भावना, योगी के मन होय।
जीवन उसका साधना, भव का बंधन खोय॥
3.
योग साधना रत सदा, अर्जित करता ज्ञान।
चंचल मन को रोकता, योगी उसको जान॥
देवदूत
1.
देवदूत के मायने, परहित के आधार।
जिनके कारण जगत के, सपने हों साकार।।
2.
जीवन उनका धन्य है, जो करते पर काज।
देवदूत की शान है, करें दिलों पर राज।।
3.
जीवन की यह रीत है, प्रीत अमर सौगात।
जिनके मन में प्रीत है, देवदूत कहलात।।
— लीला तिवानी
