बाल कविता

वाह खो-खो!

11-11 की दो टीम बनाएं हो-हो-हो,
आओ मिल-जुल खेलें हम खो-खो,
एक के बाद दूजे की आए बारी,
एक दौड़ लगाए, दूजा पकड़े कह खो-खो।

जिसको हाथ लगे, वह दौड़े बहुत तेज,
भागते हुए को धप्पा कहे बनकर नेज,
हार मान वह बाहर जाए, आए दूजा खिलाड़ी,
जो खिलाड़ी हो आउट, वो हो जाता निस्तेज।

सारे खिलाड़ी हारें तो दूसरी टीम खेले,
भागकर पकड़े जाने से बच पाने को झेले,
नियत समय में वह टीम भी जब आउट हो जाए,
हार-जीत का हो निर्णय, वाह खो-खो सब खेले!

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244