गीत/नवगीत

असफलता ही पाई हमने

आगे बढ़कर गले लगाया

स्वार्थ पास हमारे आया, हमने तब-तब है ठुकराया।

असफलता ही पाई हमने, आगे बढ़कर गले लगाया।।

अपने आपको तुम पर थोपा।

नहीं सुना, कभी दिया न मौका।

नहीं कभी है किसी को समझा,

चाहा हर दम लगाए चैका।

तुम्हारे बचपन को रौंदा है, केवल अपना गाना गाया।

असफलता ही पाई हमने, आगे बढ़कर गले लगाया।।

बचना अब हमरी छाया से।

सुखी रहो अपनी काया से।

बुद्धिमान हो कर लो मन की,

मुक्त रहो मेरी माया से।

अकेले कोई जीवन होता? पाओ तुम, मैंने ना पाया।

असफलता ही पाई हमने, आगे बढ़कर गले लगाया।।

तुम्हारे ऊपर कोई कर्ज नहीं है।

सुनना तुम कोई अर्ज नहीं है।

मुक्त कर रहा खुद से तुमको,

हमारे लिए कोई फर्ज नहीं है।

चाह न समझी कभी तुम्हारी, नहीं किया जो तुमको भाया।

असफलता ही पाई हमने, आगे बढ़कर गले लगाया।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)