मुक्तक/दोहा

दीप दिवाना

दीप पर्व की आपको, खुशियां मिले अनंत,
दौर चलें मिष्ठान के, खारा मिले तुरंत।

दीप कभी जलता नही, दीवाली की रात,
तेल संग बाती जले, यह है सच्ची बात।

अन्धकार को भेद कर, बिखरा दिया उजास,
दीप तेल बाती बने, दीवाली में ख़ास।

दीवाली में खा रहे, घूम घूम मिष्ठान,
लड्डू चकली इमरती, दीवाली कि जान।

चटक पटाखे छूटते, बम लाएं तूफ़ान,
देखो अनार फुलझड़ी, रोशन करे जहान,

दीप दिवाना कह रहा, सबसे बस इक बात,
ख़ुशी बांटने से मिले, खुशियों की सौगात।

— महेंद्र कुमार वर्मा

महेंद्र कुमार वर्मा

द्वारा जतिन वर्मा E 1---1103 रोहन अभिलाषा लोहेगांव ,वाघोली रोड ,वाघोली वाघेश्वरी मंदिर के पास पुणे [महाराष्ट्र] पिन --412207 मोबाइल नंबर --9893836328