सत्य की राह
मैं जिससे भी मिलता हूं उसे गले से लगाता हूं
किसी ने उसके बारे क्या कहा ऐतबार नहीं करता
जब खुद को सौंप ही दिया है प्रभु के हाथों में
मैं किसी की बदनीयती का, खयाल नहीं करता,
जो जैसा कर्म करेगा ,वक्त वैसा ही फल देगा,
मैं खुद उसके गुनाहों की तहकीकात नहीं करता
उसकी मर्जी के बिना तो एक पत्ता भी नहीं हिलता
जिसमें प्रभु की रजा ना हो मैं वह काम नहीं करता।
मैने तो संस्कारी जीवन में सत्य की राह पकड़ ली
मैं कभी किसी के साथ विश्वासघात नहीं करता।
— जय प्रकाश भाटिया
