दोहा
राष्ट्र चिन्ह को तोड़कर,किया राष्ट्र अपमान |
क्यों उनके इस कृत्य पर,चुप है हिन्दुस्तान ||
कैसे इनको हम सहें,हैं जाहिल इन्सान |
जिन पर हमको गर्व है,उन्हे न देगें मान ||
राष्ट्र चिन्ह इनके लिए,है मूरत बेजान |
इन्हे बताओ चिन्ह ये,है भारत की शान ||
बैल शक्ति का रूप है,दोड़ो अश्व समान |
चक्र घूम बतला रहा,सदा रहो गतिमान ||
बनो सिंह से साहसी,और बनो बलवान |
सत्यमेव जयते सदा,ये प्रतीक दें ज्ञान ||
— शालिनी शर्मा
