कविता

लिख दिया

लिख दिया गया पैमानों का हिसाब
लिख दिया गया ग़ालिब दिल का दिमाग
लिख दिया गया गद्दारों का हिसाब
लिख दिया गया गुनाहों के देवता
लिख दिया गया मैला आंचल
नहीं लिख सका मजदूर के दर्द
नहीं लिख सका झूठे नकाब
नहीं लिख सका कड़वे दिल
नहीं लिख सका दिल का दर्द …

— गंगा मांझी

गंगा मांझी

ग्वालियर, मध्य प्रदेश