कविता

तुम्हारी यादों की ख़ुशबू

तुम्हारी यादों की खुशबू ,
जब भी दिल को छूती है।
आभा लिए हुए है सौरमंडल-में,
चाँद-सा चेहरा तुम्हारा चमकता है।
महकती है तन की डाली-डाली,
कोयल-सी राग सुनाती मुझको।
आशा कितनी तुम मनमोहिनी हो,
मखमली आवाज कानों में गुंजती है।
सुनकर सुध-बुध में खो जाता हूं,
जब तुम्हारी यादें दिल को पिरोती हैं।
वीरान जंगल-सा लगता है,
जब साँसें तुममें खो जाती हैं।
सिर्फ तुम्हारी यादों में खोया हूं,
तन्हा -तन्हा और उदासी है।
धरा और अंबर है अनूठे,
पंखुड़ी तुझ पर दिल की होती है।

— कालिका प्रसाद सेमवाल

कालिका प्रसाद सेमवाल

प्रवक्ता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, रतूडा़, रुद्रप्रयाग ( उत्तराखण्ड) पिन 246171